नेपाल-बिहार-यूपी से पहुंचे हजारों श्रद्धालु
वाल्मीकिनगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
सावन माह के अंतिम चरण में वाल्मीकिनगर शिवभक्ति में डूबा हुआ है। बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में शिवभक्त और कांवरिये वाल्मीकिनगर पहुंच रहे हैं। नारायणी-गंडक संगम तट पर स्नान और जल भरने के बाद श्रद्धालु जटाशंकर धाम एवं कालेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं। गुरुवार की रात नेपाल के परसा जिला, जकतिया तथा धूमवाटांड़-भंगहा क्षेत्र से पहुंचे सौ से अधिक शिवभक्तों ने ऊपरी शिविर स्थित तीन नंबर पहाड़ पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम और रतजगा का आयोजन किया। देर रात तक चले इस धार्मिक आयोजन में शिवभजनों और वाद्य यंत्रों की मधुर धुन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

कार्यक्रम के दौरान भगवान शिव की वेशभूषा में कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। नेपाल के प्रसिद्ध लोकगायक ‘नेपाली निरहू’ ने अपनी सुमधुर आवाज से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, शिव-पार्वती विवाह की कथा का आयोजन भी किया गया, जिसे सुनकर कांवरिये भाव-विभोर हो उठे। शुक्रवार की सुबह नेपाल, बिहार और उत्तर प्रदेश से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नारायणी-गंडक संगम तट पर उमड़ पड़ी। गंगा स्नान और जल भरने के लिए पाथवे पर शिवभक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह से पूरा वाल्मीकिनगर क्षेत्र शिवमय नजर आया। संगम तट पर स्नान एवं जल भरने के बाद श्रद्धालुओं ने जटाशंकर धाम और कालेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र गूंजता रहा।

सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर वाल्मीकिनगर में श्रद्धालुओं का आगमन लगातार बढ़ रहा है। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। क्षेत्र में 24 घंटे पुलिस गश्ती की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने और पेयजल की समुचित व्यवस्था भी की गई है। अंतिम सोमवारी को लेकर वाल्मीकिनगर में धार्मिक उत्साह चरम पर है। नेपाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने यहां की धार्मिक और सांस्कृतिक एकता की तस्वीर भी पेश की है।






