वाल्मीकिनगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
वाल्मीकिनगर। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) वन प्रमंडल-2 के भेड़िहारी वन प्रक्षेत्र अंतर्गत भेड़िहारी गांव में बाघ के हमले में मारे गए किसान विजय हालदार के परिजनों को वन विभाग ने शुक्रवार को 10 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता प्रदान की। एसीएफ शशि भूषण सिंह ने मृतक की पत्नी अन्ना देवी को सहायता राशि का चेक सौंपा। इस दौरान उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नियमानुसार आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पीड़ित परिवार को यह आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। अधिकारियों के अनुसार, वन्यजीवों के हमले में जान गंवाने वाले लोगों के आश्रितों को समय पर राहत पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। गौरतलब है कि बीते 15 अगस्त को विजय हालदार, पिता हरि हालदार, गांव के समीप स्थित अपने गन्ने के खेत में घास काट रहे थे। इसी दौरान जंगल की ओर से निकले बाघ ने उन पर हमला कर दिया। बाघ के हमले में गंभीर रूप से घायल विजय हालदार की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल उत्पन्न हो गया था।

आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को बगहा-वाल्मीकिनगर मुख्य मार्ग पर रखकर प्रदर्शन किया था। ग्रामीणों ने बाघ के आतंक से निजात दिलाने, प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की थी। घटना के बाद वन विभाग की ओर से भी क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की गई थी। शुक्रवार को चेक वितरण के दौरान मुखिया प्रतिनिधि रमेश महतो, ईडीसी अध्यक्ष संतोष काजी, रामविलास यादव समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। मुखिया प्रतिनिधि रमेश महतो ने ग्रामीणों से जंगल और खेतों की ओर जाते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि जंगल अथवा आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर लोग स्वयं उसके करीब जाने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना दें। वहीं, अनुग्रह सहायता मिलने पर मृतक के परिवार ने राहत महसूस की। ग्रामीणों ने वन विभाग द्वारा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर संतोष जताया, लेकिन साथ ही जंगल से सटे गांवों में निगरानी, नियमित गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों और जंगल के आसपास बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा के ठोस इंतजाम जरूरी हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। ग्रामीणों ने वन विभाग से मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले इलाकों में लगातार निगरानी रखने, ग्रामीणों को जागरूक करने और संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है।






