विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
मधुबनी, आज सावन के चौदहवें दिन बुधवार हरियाली अमावस्या को भगवान भोलेनाथ के अनन्य भक्त पंडित विनोद मिश्र के आवास पर आयोजित रुद्राभिषेक यज्ञ में भाग लेते हुए पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने कहा कि गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग और पुष्प से विधिवत पूजन कर भगवान भोलेनाथ से हम सभी ने आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि -अभिषेक शब्द का शाब्दिक अर्थ है स्नान कराना, रुद्राभिषेक का मतलब है भगवान रुद्र का अभिषेक यानि कि शिवलिंग पर रुद्रमंत्रों के द्वारा अभिषेक करना। यह पवित्र-स्नान भगवान् मृत्युंजय शिवजी को कराया जाता है, अभिषेक को आजकल रुद्राभिषेक के रुप में ही ज्यादातर जाना जाता है, अभिषेक के कई प्रकार तथा रुप होते हैं, रुद्राभिषेक करना शिव आराधना का सर्वश्रेष्ठ तरीका माना गया है, शास्त्रों में भगवान् शिवजी को जलधाराप्रिय माना जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है।
हमारे शास्त्रों में विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक के पूजन के निमित् अनेक द्रव्यों तथा पूजन सामग्री को बताया गया है, साधक रुद्राभिषेक पूजन विभिन्न विधि से तथा विविध मनोरथ को लेकर करते हैं, किसी खास मनोरथ की पूर्ति के लिये तदनुसार पूजन सामग्री तथा विधि से रुद्राभिषेक की जाती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि किसी भी पुराने नियमित रूप से पूजे जाने वाले शिवलिंग का अभिषेक बहुत ही उत्तम फल देता है, किन्तु यदि पारथी बना कर के शिवलिंग का अभिषेक किया जाय तो बहुत ही शीघ्र चमत्कारिक शुभ परिणाम मिलता है। जैसा कि रुद्राभिषेक की वेदों में विद्वानों ने भूरि भूरि प्रशंसा की गयी है।

हरियाली अमावस्या का पावन दिन शिव का प्रिय दिवस है। इस दिन घर में या किसी भी शिवालय में शिव अभिषेक या शिवजी की पूजा करें तो हम सभी के लिये अति फलदायी है। आज के पूजन की विशेषता यह रही कि साधिका ने भांग को स्वयं सिलौटा पर पीसकर तैयार किया था। जिसे प्रेम पूर्वक भोलेनाथ को घोंटाया गया।ऐसी मान्यता है कि इस विधि से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।






