मानसून में बढ़े जलस्तर के बीच तीन नंबर गेट पर दिखा विशालकाय अजगर, जंगल में छोड़ा गया
वाल्मीकिनगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
वाल्मीकिनगर। मानसून के दौरान गंडक नदी के बढ़े जलस्तर के बीच गुरुवार की सुबह वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज के तीन नंबर फाटक पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब करीब 10 फीट लंबा एक विशालकाय अजगर लोहे के फाटक में फंसा हुआ दिखाई दिया। अजगर के फंसे होने की सूचना मिलते ही बराज पर तैनात कर्मियों ने तत्काल वन विभाग को जानकारी दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सूझबूझ व सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान चलाकर अजगर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बताया जाता है कि इन दिनों गंडक नदी का जलस्तर लगातार बढ़ा हुआ है। तेज बहाव के कारण बहकर आया अजगर बराज के तीन नंबर गेट के लोहे के ढांचे में फंस गया था। विशालकाय अजगर को फंसा देख बराज कर्मियों एवं आसपास मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालांकि वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से स्थिति जल्द ही सामान्य हो गई।

रेस्क्यू अभियान का नेतृत्व वनपाल आशीष कुमार ने किया। उनके साथ पहुंचे वनकर्मियों ने सबसे पहले क्षेत्र को सुरक्षित घेराबंदी कर आम लोगों को दूर किया, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी न हो। इसके बाद विशेष उपकरणों एवं प्रशिक्षित तकनीक का उपयोग करते हुए काफी मशक्कत के बाद अजगर को फाटक से बाहर निकाला गया। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि अजगर को किसी प्रकार की चोट न पहुंचे। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मानसून के समय नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से जंगली जीव बहाव के साथ बहकर आबादी वाले क्षेत्रों या बराज जैसी संरचनाओं तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी वन्यजीव के दिखने पर उसे पकड़ने या छेड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए, बल्कि तत्काल वन विभाग को सूचना देनी चाहिए। रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम ने अजगर को सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया, जहां वह अब पूरी तरह सुरक्षित है।






