गुरु पूर्णिमा और बाघ दिवस पर गुरुओं व स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित हुआ पौधारोपण
वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि वाल्मीकि नगर में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस एवं गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर वाल्मीकि नगर स्थित स्वाभिमान बटालियन परिसर में विशेष पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और प्रकृति के प्रति जन-जागरूकता का संदेश दिया गया। इस अवसर पर आंवला, आम, जामुन, लीची, अशोक, चंपा, नागेश्वर चंपा तथा मौलेश्वरी सहित विभिन्न छायादार एवं फलदार पौधों का रोपण कर उन्हें गुरुओं एवं देश के स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई करते हुए समादेष्टा निर्मला कुमारी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने लोगों से सिंगल यूज़ प्लास्टिक बैग का उपयोग पूरी तरह बंद करने की अपील करते हुए कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण प्रकृति और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। यदि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण देना है तो हमें अभी से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनना होगा।

उन्होंने विशेष रूप से वाल्मीकिनगर क्षेत्र के लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और वनस्पतियों का संरक्षण करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि घने जंगल ही बाघ सहित अन्य वन्यजीवों का सुरक्षित आवास हैं। जंगलों का संरक्षण होगा तो जैव विविधता सुरक्षित रहेगी और प्रकृति का संतुलन भी बना रहेगा। उन्होंने लोगों से जंगल के राजा बाघ के संरक्षण में सहभागी बनने और वन संपदा की रक्षा करने का संकल्प लेने का आग्रह किया। इस अवसर पर प्रकृति प्रेमी मनोज कुमार ने भी पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एक पौधा लगाना केवल पेड़ उगाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, जल और सुरक्षित भविष्य का आधार तैयार करना है। उन्होंने लोगों से हर विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों, जवानों एवं स्थानीय लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और प्लास्टिक मुक्त समाज बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस, अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस और गुरु पूर्णिमा जैसे महत्वपूर्ण अवसर केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रहें, बल्कि इन्हें प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने और समाज में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करने का माध्यम बनाया जाए। कार्यक्रम का समापन पौधों की सुरक्षा और उनके नियमित संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ।






