वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वाल्मीकि सभागार में गेंडा संरक्षण एवं रेस्क्यू को लेकर आठों रेंज के वनकर्मियों के लिए एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में वन विभाग के वरीय अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में वनकर्मियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के गेंडा विशेषज्ञ अमित शर्मा (असम) तथा दुधवा टाइगर रिजर्व के प्रशिक्षक रोहित ने वनकर्मियों को गेंडे के व्यवहार, उसके संरक्षण, रेस्क्यू तकनीक, भीड़ नियंत्रण, ट्रैकिंग तथा आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के बारे में विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि गेंडे के किसी नए क्षेत्र में पहुंचने की स्थिति में किस प्रकार वैज्ञानिक एवं सुरक्षित तरीके से कार्रवाई की जानी चाहिए।

कार्यशाला में बताया गया कि नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान से कई बार मानसून के दौरान बाढ़ के तेज बहाव में गैंडे बहकर भारत की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे मामलों में वे अक्सर वाल्मीकिनगर परिक्षेत्र तथा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के विभिन्न वन क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने और वनकर्मियों की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से इस प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।
वन अधिकारियों ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा से सटे इस संवेदनशील क्षेत्र में गेंडों की आवाजाही की संभावना बनी रहती है। इसलिए वनकर्मियों को आधुनिक तकनीकों एवं मानक संचालन प्रक्रियाओं की जानकारी होना आवश्यक है।






