बिहार विधान परिषद में गूंजा मुद्दा, केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव
पटना/ विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
पत्रकारों को भारतीय रेलवे में मिलने वाली 50 प्रतिशत किराया रियायत को दोबारा लागू कराने की मांग अब जोर पकड़ती दिख रही है। बुधवार को बिहार विधान परिषद में इस विषय पर गैर-सरकारी संकल्प पेश किया गया, जिसे सदन की सहमति मिलने के बाद राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को अनुशंसा भेजने का निर्णय लिया है।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए बिहार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने स्पष्ट किया कि सदन द्वारा पारित प्रस्ताव को केंद्र सरकार तक भेजा जाएगा, ताकि पत्रकारों को रेलवे किराए में मिलने वाली 50 प्रतिशत रियायत की सुविधा पुनः बहाल की जा सके।
राष्ट्रीय जनता दल के विधान पार्षद अशोक कुमार पांडे ने संकल्प प्रस्तुत करते हुए बताया कि पत्रकारों को लगभग 45 वर्षों से यह सुविधा मिलती रही है। वर्ष 2009-10 के रेल बजट में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने इस रियायत को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया था। बाद में 2016-17 में मान्यता प्राप्त पत्रकारों को रियायती पास पर ई-टिकट बुकिंग की सुविधा भी दी गई थी।
हालांकि, मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान यह सुविधा बंद कर दी गई, जो अब तक बहाल नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि लगातार यात्रा करने वाले पत्रकारों के लिए यह रियायत बेहद जरूरी है और इसे जल्द बहाल किया जाना चाहिए।

इस फैसले पर प्रेस मेंस वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार मिश्रा, सचिव दया शंकर तिवारी और संगठन सचिव बाल कृष्ण ने खुशी जताते हुए इसे लंबे संघर्ष की पहली बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि जब तक आदेश जारी नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार एस. एन. श्याम तथा बिहार प्रेस मेंस यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अनमोल कुमार ने भी इस मुद्दे को लंबे समय से उठाया था और प्रधानमंत्री व केंद्रीय रेल मंत्री को कई बार पत्र लिखकर रियायत बहाल करने की मांग की थी।
पत्रकार संगठनों ने बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश कुमार सिंह, संकल्प प्रस्तुत करने वाले सदस्यों और राज्य सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यह देश में पहला मौका है जब किसी विधान परिषद ने पत्रकारों की रेल रियायत बहाली के मुद्दे पर गंभीर पहल करते हुए संकल्प पारित किया है।






