वाल्मीकिनगर में दुर्लभ कछुआ मिला, वन विभाग ने सुरक्षित जंगल में छोड़ा

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बाल्मीकि नगर से नन्दलाल पटेल की रिपोर्ट

महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि वाल्मीकिनगर के तीन नंबर पहाड़ स्थित जल संसाधन विभाग के ऊपरी शिविर परिसर में मंगलवार सुबह एक दुर्लभ प्रजाति का कछुआ मिलने से क्षेत्र में उत्सुकता का माहौल बन गया। कछुआ परिसर में कुत्तों से घिरा हुआ था, जिससे उसकी जान पर खतरा उत्पन्न हो गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, तीन नंबर पहाड़ निवासी नंद गोपाल के कैंपस में कुत्तों के लगातार भौंकने की आवाज सुनकर स्थानीय लोग बाहर निकले। मौके पर पहुंचने पर देखा गया कि कई कुत्तों ने एक कछुए को घेर रखा है। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए कुत्तों के बीच से कछुए को सुरक्षित बाहर निकाला और तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कछुए को अपने संरक्षण में ले लिया।

रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि यह सूखी भूमि पर रहने वाली दुर्लभ प्रजाति का ‘इंडोटेस्टूडो इलोंगोटा’ (Indotestudo elongata) कछुआ है, जो भारत सहित दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे बांग्लादेश और इंडोनेशिया में पाया जाता है। उन्होंने बताया कि यह प्रजाति लुप्त होने के कगार पर है। वन विभाग ने कछुए की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के घने जंगल में उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया। वन विभाग ने स्थानीय लोगों की सतर्कता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी जागरूकता की सराहना की है। साथ ही अपील की है कि यदि कहीं भी दुर्लभ वन्यजीव दिखाई दें, तो उन्हें नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत विभाग को सूचना दें, ताकि उन्हें सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास में पहुंचाया जा सके।

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