विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
निर्जला एकादशी के दिन दान का विशेष महत्व होता है. इस दिन जल से भरे घड़े, अन्न, वस्त्र, छाता, जूते, आसन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना बहुत शुभ माना जाता
पंडित कथा वाचक रिपुसूदन द्विवेदी ने बताया कि, शास्त्रों में . बताया गया है कि निर्जला एकादशी के दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और कभी नष्ट नहीं होता. साथ ही भगवान विष्णु की पूजा, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण करने से भी विशेष पुण्य प्राप्त होता है.जो व्यक्ति इस व्रत को नियम और श्रद्धा से करता है, वह न केवल स्वयं का बल्कि अपने पूर्वजों और आने वाली पीढ़ियों का भी कल्याण करता है. इस दिन किया गया जप, तप और दान अक्षय फल देने वाला माना गया है. व्रत के अंत में द्वादशी के दिन पूजा करके ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और फिर स्वयं व्रत का पारण किया जाता है.
, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण किया था, इसलिए इसे रुक्मिणी हरण एकादशी भी कहा जाता है. वहीं भीमसेन द्वारा इस व्रत को अपनाने के कारण इसे पांडव एकादशी भी कहा जाता है. इस प्रकार निर्जला एकादशी का व्रत कठिन होने के बावजूद अत्यंत फलदायी माना जाता है, जो व्यक्ति को पुण्य और मोक्ष की ओर ले जाता है.






