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अंतर्राष्ट्रीय विधिविद् और महान हिन्दी-सेवी थे साँवलिया बिहारी लाल वर्मा : डॉ. अनिल सुलभ

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रमेश ठाकुर – पश्चिम चंपारण, बिहार
दिनांक:- 18-06-2026

अर्थशास्त्र, इतिहास एवं अंतर्राष्ट्रीय विधि के प्रख्यात विद्वान तथा राष्ट्रभाषा हिन्दी के समर्पित सेवक साँवलिया बिहारी लाल वर्मा की 131वीं जयंती के अवसर पर गुरुवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में श्रद्धांजलि सभा एवं कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके बहुआयामी व्यक्तित्व एवं राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।समारोह की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि साँवलिया बिहारी लाल वर्मा ऐसे महान व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश, समाज और हिन्दी भाषा की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि वर्मा एक स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद्, प्राध्यापक, साहित्यकार तथा अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थाओं के संस्थापक एवं संरक्षक रहे। वे तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधान परिषद के लिए निर्वाचित प्रथम सदस्य भी थे।

डॉ. सुलभ ने बताया कि साँवलिया बिहारी लाल वर्मा भारतीय विधि आयोग तथा बिहार राष्ट्रभाषा परिषद के सदस्य रहे। उनका अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन और बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन से स्थापना काल से ही गहरा जुड़ाव था। वर्ष 1927 में सोनपुर में आयोजित विशेष अधिवेशन की उन्होंने अध्यक्षता की थी। उन्होंने कहा कि देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के ममेरे अनुज साँवलिया बिहारी लाल वर्मा बाल्यकाल से ही अत्यंत मेधावी थे और उन्होंने ‘यूरोपीय महाभारत’, ‘गीता-विश्वकोश’ तथा ‘अंतर्राष्ट्रीय विधि’ सहित अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। समारोह का उद्घाटन करते हुए पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मान्धाता सिंह ने कहा कि समाज में वही व्यक्ति स्थायी सम्मान प्राप्त करता है जो अपने कर्म और गुणों से पहचान बनाता है। साँवलिया बिहारी लाल वर्मा ऐसे ही महान विद्वान और साहित्यकार थे, जिनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। इस अवसर पर बर्मिंघम (इंग्लैंड) से पधारे वरिष्ठ कवि एवं चिकित्सक डॉ. कृष्ण कन्हैया का सम्मेलन की ओर से अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मान किया गया। सम्मान समारोह में साहित्यकारों और कवियों ने उनका अभिनंदन किया।

इसके उपरांत आयोजित कवि-सम्मेलन का शुभारंभ चंदा मिश्र की वाणी-वंदना से हुआ। सम्मेलन में सम्मानित कवि डॉ. कृष्ण कन्हैया के अलावा वरिष्ठ कवि एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के अवकाशप्राप्त अधिकारी बच्चा ठाकुर, डॉ. रत्नेश्वर सिंह, आराधना प्रसाद, प्रो. सुनील कुमार उपाध्याय, सिद्धेश्वर, कुमार अनुपम, ईं. अशोक कुमार, विभारानी श्रीवास्तव, मृत्युंजय गोविंद, मिथिलेश कुमार सिन्हा, नीरव समदर्शी, इन्दुभूषण सहाय, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, सुनीता रंजन तथा अश्विनी कुमार सहित अनेक कवियों एवं कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं की खूब सराहना प्राप्त की।कार्यक्रम का संचालन कवि ब्रह्मानंद पाण्डेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।

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