सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ पूर्व सुरक्षा कार्य में देरी से ग्रामीणों में आक्रोश
वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ को लेकर सीमावर्ती क्षेत्रों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ने लगी है। रामपुरवा के समीप विवादित सुस्ता क्षेत्र के पास स्थित पटेरहवा मार्ग पर बाढ़ पूर्व सुरक्षा कार्य में हो रही देरी को लेकर ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग से शीघ्र कार्य पूरा कराने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि गंडक नदी में उफान आते ही रामपुरवा के समीप पटेरहवा वाले रास्ते से बाढ़ का पानी गांवों में प्रवेश कर जाता है। इससे आसपास के क्षेत्रों में जलभराव और तबाही की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। हर वर्ष इस मार्ग से घुसने वाला बाढ़ का पानी लोगों के लिए बड़ी परेशानी और आर्थिक नुकसान का कारण बनता है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग द्वारा इस संवेदनशील स्थल पर बायो बैग क्रेटिंग और अन्य सुरक्षात्मक कार्य बरसात शुरू होने तथा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद कराने की योजना बनाई जा रही है। इस सूचना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि बाढ़ आने का इंतजार करने के बजाय समय रहते सुरक्षा कार्य पूरा किया जाना चाहिए, ताकि संभावित खतरे को टाला जा सके।
ग्रामीणों ने बताया कि कांही टोला के समीप से भी हर वर्ष बाढ़ का पानी प्रवेश करता है। इसके कारण चकदहवा, कांही टोला और झंडू टोला जैसे गांवों में भारी तबाही मचती है। खेतों में लगी फसलें बर्बाद हो जाती हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की निगाहें अब जल संसाधन विभाग पर टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर किए गए सुरक्षा कार्य ही बाढ़ के खतरे को कम कर सकते है






