Tuesday, June 9, 2026
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बगहा के विवेक कुमार ने राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में रचा इतिहास, साइक्लिंग एवं बैडमिंटन में जीते दो स्वर्ण पदक

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा प्रखंड अंतर्गत शेरवा ग्राम निवासी प्रतिभाशाली दिव्यांग खिलाड़ी विवेक कुमार ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार उपलब्धि हासिल करते हुए राज्य का गौरव बढ़ाया है। अहमदाबाद, गुजरात में 06 एवं 07 जून 2026 को आयोजित 13वीं राष्ट्रीय चैंपियनशिप फॉर ऑटिज्म एवं सेरेब्रल पाल्सी में उन्होंने साइक्लिंग एवं बैडमिंटन दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर दोहरी सफलता अर्जित की। प्रतियोगिता का आयोजन सेरेब्रल पाल्सी एंड ऑटिज्म स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया तथा सेरेब्रल पाल्सी स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ गुजरात के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमें देशभर से आए खिलाड़ियों ने भाग लिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच विवेक कुमार ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, दृढ़ इच्छाशक्ति और खेल कौशल का परिचय देते हुए दोनों स्पर्धाओं में प्रथम स्थान प्राप्त किया। साइक्लिंग प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके पश्चात बैडमिंटन प्रतियोगिता में भी उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए फाइनल मुकाबला जीतकर दूसरा स्वर्ण पदक हासिल किया। एक ही राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक जीतना उनके अथक परिश्रम, समर्पण और संघर्ष का परिणाम है।

विवेक कुमार, पिता श्री मुन्ना चौधरी एवं माता श्रीमती लालपरी देवी के सुपुत्र हैं तथा ग्राम–शेरवा, पोस्ट–नरवल बरवल, प्रखंड–बगहा-02, जिला–पश्चिम चंपारण (बिहार) के निवासी हैं। वे वर्तमान में भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा विभाग, पटना में लेखा परीक्षक (Auditor) के पद पर कार्यरत हैं। खेलों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, अनुशासन एवं निरंतर प्रयास ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई है। उनकी उपलब्धि न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर खेल प्रेमियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मित्रों एवं शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी हैं। इस अवसर पर विवेक कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों, प्रशिक्षकों तथा शुभचिंतकों को देते हुए कहा—”हर उपलब्धि के पीछे परिवार, गुरुजनों और शुभचिंतकों का अमूल्य योगदान होता है। यह स्वर्णिम सफलता उन सभी के आशीर्वाद, मार्गदर्शन और सहयोग का परिणाम है। मैं अपनी यह उपलब्धि उन सभी को समर्पित करता हूँ।”

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