विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बिहार में सरकारी मद (GOB) से वेतन पाने वाले नियोजित शिक्षकों का पिछले तीन महीनों से वेतन भुगतान बाधित होने से व्यापक असंतोष व्याप्त है। शिक्षकों को ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर लिखित रूप में केवल इतना बताया जा रहा है कि “आवंटन उपलब्ध नहीं है”, जबकि मौखिक स्तर पर CFMS (कॉम्प्रिहेंसिव फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) में तकनीकी दिक्कतों को कारण बताया जा रहा है। इस विरोधाभासी स्थिति ने शिक्षकों को असमंजस और आर्थिक संकट में डाल दिया है। प्रभावित शिक्षकों का कहना है कि नियमित कार्य करने के बावजूद समय पर वेतन नहीं मिलना उनके परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक खर्चों पर सीधा असर डाल रहा है। कई शिक्षकों ने बताया कि वे कर्ज लेकर घर चला रहे हैं। उनका यह भी आरोप है कि संबंधित विभागों द्वारा स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति के लिए शिक्षा विभाग और वित्त विभाग दोनों की भूमिका अहम है। यदि बजट आवंटन लंबित है तो यह वित्तीय प्रबंधन की कमी को दर्शाता है, वहीं CFMS में तकनीकी गड़बड़ी प्रशासनिक तैयारी पर सवाल खड़े करती है। तीन महीने तक भुगतान न होना एक सामान्य देरी नहीं बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता माना जा रहा है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इस मुद्दे पर खुलकर सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। इससे शिक्षकों में यह भावना मजबूत हो रही है कि उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
शिक्षक संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर लंबित वेतन का भुगतान सुनिश्चित करने, CFMS की खामियों को दूर करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।






