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शिक्षा और समाज के लिए समर्पित थे शिवदासिनी त्रिपाठी -पं-भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार

मधुबनी, पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने पूर्व प्रधानाचार्य पंडित शिवदासिनी त्रिपाठी के प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि -संसार में जीवन मृत्यु का क्रम चलता रहेगा, हमें इसकी सीख श्रद्धांजलि सभा से लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सुख अथवा दुःख, जिस पर भी आप ध्यान केंद्रित करेंगे वही बात जीवन में प्रभावी हो जायेगी। यदि आप केवल दुःख पर ध्यान देंगे तो हमेशा दुःखी रहेंगे और सुख पर ध्यान देंगे तो हमेशा सुखी रहेंगे। यह जीवन का शाश्वत नियम है, कि आप जिस पर ध्यान देंगे वही बात जीवन में सक्रिय हो जाती है। विज्ञान ने भी सिद्ध किया है, कि जीवन में जिस वस्तु की आप उपेक्षा करने लगते हैं, वो वस्तु धीरे-धीरे अपने अस्तित्व को खोना प्रारंभ कर देती है।

प्रेम हो, करुणा हो, जीवन का उल्लास हो, प्रसन्नता हो, सुख हो अथवा दुःख ही क्यों न हो, जिसकी उपेक्षा करेंगे वही आपके जीवन में अपना प्रभाव कम करता चला जायेगा। जहाँ सकारात्मक दृष्टि जीवन में सुख की जननी होती है, वहीं नकारात्मक दृष्टि जीवन को दुःख और विषाद से भी भर देती है। इसलिए जीवन में सदा सकारात्मक दृष्टि ही रखी जानी चाहिए ताकि व्यक्ति के दुःख और विषाद जैसे काल्पनिक शत्रुओं का समूल नाश हो सके। कार्यक्रम में उपस्थित सर्व श्री शिवसागर शुक्ल, पंडित रामवृक्ष मणि, राजेश शुक्ला, पंकज शुक्ला,बबलू शुक्ला, रामबाबू तिवारी, निलेश त्रिपाठी, दिनेश कुमार गुप्ता ने अपने विचार रखे। पंडित विंध्यवासिनी त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया।

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