संविधान को अपनाने का प्रतीक है गणतंत्र दिवस

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हर्षोल्लास से मना 77वां गणतंत्र दिवस, संविधान शिल्पी किए गए याद

इसी दिन संविधान लागू होने से भारत बना लोकतांत्रिक संप्रभु गणराज्य : शिक्षक सुनिल

राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत के साथ संविधान की प्रस्तावना का हुआ पाठ

बगहा/ पिपरासी, विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार

सोमवार 26 जनवरी को पुरे भारत में हर्षोल्लास के साथ 77वां गणतंत्र दिवस मनाया गया। सभी संस्थानों में राष्ट्र ध्वज तिरंगा फहराया गया और झंडे को सलामी दी गई।
बच्चे, बूढ़े युवा सभी देशभक्ति के रंग में रंगे नजर आए।इस अवसर पर उच्च माध्यमिक विद्यालय डुमरी भगड़वा, राजकीय मध्य विद्यालय लक्षनही में प्रधानाध्यापक जीतेन्द्र कुमार शर्मा ने झंडा फहराया। शिक्षक, शिक्षिकाएं, विद्यार्थी व आगंतुक अतिथियों ने झंडे को सलामी दिया। विद्यालय परिवार तथा उपस्थित लोगों ने राष्ट्रगान गाया।शिक्षक सुनिल कुमार ने राष्ट्रगीत व भारतीय संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया।

शिक्षक सुनिल कुमार ने बताया कि इसी दिन 26 जनवरी 1950 को देश में संविधान को लागू हुआ था जिसके बाद स्वतंत्र भारत एक लोकतांत्रिक, संप्रभु, गणराज्य बना। गणतंत्र दिवस संविधान को अपनाने का प्रतीक है।
मौके पर प्रभारी प्रधानाध्यापक जीतेन्द्र कुमार शर्मा, शिक्षक करुणा शंकर दुबे, राघवेंद्र प्रताप सिंह, सुनिल कुमार, शिल्पा वर्मा, योगेंद्र प्रसाद, शशि प्रसाद तिवारी, निशा कुमारी, सुभाष कुमार भारती, अनीता देवी, हरेंद्र प्रसाद, अरविन्द चौधरी, इमाम कौशर, अनीता यादव, सिम्पी, नेहा कुमारी, सिकंदर अली, मनीष कुमार आदि सभी शिक्षक, शिक्षिकाएं, अतिथि उपस्थित रहे।

गणतंत्र दिवस पर हुआ पौधारोपण

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर उच्च माध्यमिक विद्यालय डुमरी भगड़वा, राजकीय मध्य विद्यालय लक्षनही प्रांगण में प्रधानाध्यापक जीतेन्द्र कुमार शर्मा, सुभाष कुमार भारती व सुनिल कुमार द्वारा पौधरोपण किया गया। शिक्षकों ने कहा कि पेड़ पौधे हमारी धरती, पृथ्वी, पर्यावरण को संतुलित रखते हैं तथा हमें शुद्ध वायु, छाया, फल, औषधि आदि देते हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण आवश्यक है।

संविधान को अपनाने व पूर्ण स्वराज की याद का प्रतीक है गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान के 26 जनवरी 1950 को पूर्णतः लागू होने और देश के एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बनने का ऐतिहासिक प्रतीक है। उक्त बातें स्थानीय शिक्षक सुनिल कुमार ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर कहा। उन्होंने आगे कहा कि यह राष्ट्रीय पर्व, संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को अपनाए गए भारतीय संविधान के प्रति सम्मान और देशभक्ति का प्रतीक है। देशवासी प्रतिवर्ष देश की एकता, संविधान के आदर्शों (न्याय, स्वतंत्रता, समता) और संवैधानिक स्वशासन को उत्सव के रुप में मनाते हैं। यह दिवस हमें अधिकारों और कर्तव्यों के महत्व की याद दिलाता है, जिसका उद्देश्य राष्ट्र को एकता और समानता के सूत्र में बांधना है। गणतंत्र दिवस हमें 26 जनवरी 1930 में ‘पूर्ण स्वराज’ की घोषणा की याद भी दिलाता है।

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