विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
गोपालगंज (विजयीपुर): सूचना का अधिकार (RTI) कार्यकर्ता एवं पत्रकार सुरेश चंद्र पांडेय उर्फ त्यागी पर जानलेवा हमले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित पत्रकार ने विजयीपुर थाना में लिखित आवेदन देकर नामजद एवं अज्ञात दबंगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित के अनुसार वे सामाजिक कार्यकर्ता, RTI कार्यकर्ता एवं पत्रकार हैं। उन्होंने सिंहपुर गांव से संबंधित भूमि मापी में अनियमितता, जन वितरण प्रणाली (PDS), पंचायत चुनाव 2021 में आदर्श आचार संहिता उल्लंघन तथा पंचायत शिक्षक नियोजन से जुड़ी जानकारियां सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी थीं। इन तथ्यों पर आधारित समाचार 13 जनवरी 2026 को एक स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ था, जिससे संबंधित लोग आक्रोशित थे।
आवेदन में बताया गया है कि 15 जनवरी 2026 की शाम करीब 4–5 बजे, जब वे विजयीपुर से अपने गांव मठिया लौट रहे थे, तभी सिंहपुर मस्जिद के पास पहले से घात लगाए बैठे लोगों ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि सुदर्शन गिरी, सुनील कुमार गिरी, शैलेश कुमार गिरी उर्फ विजय प्रताप गिरी, कुंदन गिरी सहित दर्जनों लोगों ने जबरन उन्हें एक निर्जन स्थान पर ले जाकर रॉड, हॉकी और डंडे से बेरहमी से पिटाई की।
पीड़ित का कहना है कि जब उन्होंने स्वयं को पत्रकार बताया, तो हमलावरों ने जान से मारने की धमकी दी। जान बचाने के लिए माफी मांगने पर उन्हें छोड़ा गया, लेकिन जाते-जाते आरोपियों ने सादे कागज पर जबरन हस्ताक्षर व अंगूठे का निशान लिया, मोबाइल फोन छीन लिया और चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी भी प्रकार की सूचना मांगी या समाचार प्रकाशित किया गया तो उनकी हत्या कर दी जाएगी।
घटना के बाद से पीड़ित मानसिक रूप से भयभीत और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी संभावित खतरे को लेकर प्रशासन को अवगत कराया गया था, बावजूद इसके कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। अब उन्होंने थाना में आवेदन देकर BNS की सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा जान-माल की सुरक्षा की मांग की है।
इस घटना के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। RTI कार्यकर्ताओं एवं पत्रकार संगठनों ने इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताते हुए दोषियों के खिलाफ अविलंब सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना यह है कि पुलिस एवं प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी शीघ्रता से संज्ञान लेते हुए पीड़ित को न्याय और सुरक्षा प्रदान करता है।






