25 किलोमीटर तक चल रहा निर्माण कार्य, करीब 500 घरों को मिला नोटिस; ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग उठाई
विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा। एनएच-727 मुख्य मार्ग के छोटकी पट्टी से कदमहवा सैनिक रोड तक करीब 25 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण एवं निर्माण कार्य शुरू होने के बाद आसपास के गांवों में हलचल तेज हो गई है। सड़क निर्माण की जद में आने वाले कच्चे-पक्के मकानों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। इसको लेकर प्रभावित ग्रामीणों में चिंता और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है। कार्यपालक अभियंता कार्यालय, पथ निर्माण विभाग प्रमंडल, बेतिया की ओर से सड़क की जमीन में पड़ने वाले मकानों को लेकर करीब पांच सौ घरों के लोगों को नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है। सड़क निर्माण के लिए की गई मापी के बाद जिन मकानों का हिस्सा सड़क की सीमा में आ रहा है, उन्हें लाल पेंट से चिह्नित किया गया है। संबंधित परिवारों को चिह्नित हिस्से को हटाने का निर्देश दिया गया है।

सड़क चौड़ीकरण की जद में चमवलिया, लखनीया, बनचहरी, महुआ, सपही, चीउठहा, बड़गांव सहित कई गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवार वर्षों से जिस जमीन पर घर बनाकर रह रहे थे, अब सड़क चौड़ीकरण के कारण उनके आशियाने टूटने की स्थिति में हैं। खासकर गरीब और भूमिहीन परिवारों के सामने रहने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। लखनीया गांव के सुरेश उरांव, ललचन उरांव, दिनेश उरांव, परमेश्वर उरांव, जोगेश्वर उरांव, राजेंद्र उरांव और तिवारी उरांव समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की मापी कर मकानों के उस हिस्से को लाल रंग से चिह्नित किया गया है, जिसे निर्माण कार्य के लिए हटाया जाना है। ग्रामीणों के अनुसार उन्हें बताया गया है कि यदि निर्धारित समय में संबंधित हिस्सा नहीं हटाया गया तो प्रशासनिक स्तर से उसे हटाया जाएगा और उसका खर्च संबंधित लोगों से वसूला जा सकता है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मकान टूटने के बावजूद उन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि कई परिवारों के पास रहने के लिए यही एकमात्र जमीन है। ऐसे में घर टूटने के बाद वे कहां जाएंगे, यह सबसे बड़ी चिंता है। वहीं सड़क निर्माण कार्य से जुड़े संवेदक के अनुसार निर्माण में सबसे बड़ी बाधा हरे पेड़ बन रहे हैं। सड़क को निर्धारित चौड़ाई में विकसित करने के लिए कई स्थानों पर पेड़ों और पुराने निर्माणों को हटाना पड़ रहा है। इधर, स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता महेंद्र उरांव ने बताया कि प्रभावित भूमिहीन परिवारों की समस्या को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष अचिन्त्य लल्ला से मांग की गई है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के पास रहने के लिए दूसरी जमीन नहीं है, उन्हें सरकारी स्तर पर पांच डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने की पहल होनी चाहिए। बताया गया कि इस दिशा में आश्वासन भी दिया गया है।

ग्रामीणों ने स्थानीय भाजपा विधायक राम सिंह से भी मामले में हस्तक्षेप कर प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान कराने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि गरीब परिवारों के घर उजड़ने की स्थिति के बावजूद उनकी समस्याओं की अब तक समुचित सुधि नहीं ली गई है। ग्रामीणों की मांग है कि सड़क चौड़ीकरण का कार्य विकास के लिए जरूरी है, लेकिन इसके साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास की कीमत गरीब परिवारों को अपना आशियाना खोकर न चुकानी पड़े।






