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भाजपा की सम्राट चौधरी सरकार गरीब विरोधी नीतियां वापस ले : खेग्रामस

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अनिल कुमार शर्मा मझौलिया पश्चिम चंपारण

अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के राज्यव्यापी आह्वान पर गरीबों, खेत मजदूरों और ग्रामीण श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर 13 अगस्त को मझौलिया प्रखंड में सामूहिक भूख-हड़ताल शुरू की गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूरों और गरीबों ने अनशन में शामिल होकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की।
अनशन को संबोधित करते हुए खेग्रामस के जिला कमिटी सदस्य रिखी साह, महराज महतों, रविकान्त पासवान, बिहार राज्य निर्माण मजदूर महा सभा जिला संयोजक जवाहर प्रसाद ने कहा कि भाजपा की सम्राट चौधरी सरकार गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण जनता के हितों की लगातार अनदेखी कर रही है। गरीबों को उनके अधिकार देने के बजाय उन्हें राशन, आवास, जमीन, रोजगार और पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि जो गरीब जहां बसे हैं, उन्हें पीपी एक्ट 1947 के तहत बासगीत पर्चा देना होगा और सभी भूमिहीन परिवारों को कम से कम 5 डिसमिल जमीन उपलब्ध करानी होगी। सभी पंचायतों में भूमिहीनों के लिए आवासीय कॉलोनी बनाई जाए तथा इंदिरा आवास की राशि बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जाए और जमीन के मालिकाना कागज की अनिवार्यता समाप्त की जाए।


उन्होंने राशन सूची से गरीबों के नाम काटने के फैसले को तत्काल वापस लेने, प्रत्येक गरीब परिवार को राशन कार्ड देने तथा बिहार सरकार के बजट से दाल उपलब्ध कराने की मांग की।
खेग्रामस नेताओं ने कहा कि मनरेगा को कमजोर करने वाली नीतियां बंद कर ग्रामीण मजदूरों को पर्याप्त काम और उचित मजदूरी दी जाए। अकुशल मजदूरों के लिए ₹700 प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी घोषित की जाए। प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, सम्मान और रोजगार की गारंटी के लिए कानून बनाया जाए। उन्होंने गांव के गरीब मजदूर-किसानों से पानी, सफाई और होल्डिंग टैक्स की वसूली बंद करने, सभी वृद्धों, दिव्यांगों और विधवाओं को ₹3000 मासिक पेंशन देने तथा शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाकर सरकारी विद्यालयों को नवोदय विद्यालय के स्तर पर विकसित करने की मांग की। वक्ताओं ने अति पिछड़ी जातियों के सुरक्षा और सम्मान के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति की तर्ज पर विशेष कानून बनाने की भी मांग की। खेग्रामस नेताओं ने कहा कि 13 अगस्त का यह सामूहिक अनशन केवल मांगों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है। सरकार यदि इन मांगों पर गंभीरता से पहल नहीं करती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
खेग्रामस ने प्रशासन से सभी मांगों पर तत्काल सकारात्मक कार्रवाई करने और आंदोलनकारियों से सम्मानजनक वार्ता करने की मांग की।

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