मल्टीलेयर खेती किसानों के लिए वरदान : केवीके माधोपुर में प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन

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अनिल कुमार शर्मा मझौलिया पश्चिम चंपारण

प्रति इकाई क्षेत्रफल से अधिक लाभ एवं कम जोखिम में खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर में “मल्टी लेयर फार्मिंग” विषय पर एक प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मल्टीलेयर खेती के महत्व के बारे में जागरूक करना था, ताकि वे इसे अपनाकर प्रति इकाई क्षेत्रफल से अधिक लाभ प्राप्त करने के साथ-साथ लागत में कमी करके टिकाऊ खेती की ओर अग्रसर हो सकें। डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह, वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर ने बताया कि किसानों को प्रशिक्षण देने के उपरांत उन्हें नाबार्ड एवं कृषि क्षेत्र में कार्यरत अन्य संस्थाओं से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है, जिससे वे अधिक लाभान्वित हो सकें।

डॉ. सिंह ने बताया कि कम जमीन में ज्यादा उत्पादन का यह उत्तम उदाहरण है। एक ही खेत में 3-4 तरह की सब्जियां ली जा सकती हैं।
ऊपर लता वाली: लौकी, करेला, तोरई, खीरा
बीच में मध्यम ऊंची भिंडी, बैंगन, मिर्च, टमाटर
नीचे जमीन के पास: पालक, मेथी, मूली, गाजर, धनिया

मल्टीलेयर खेती के फायदे


साल भर आमदनी 90 दिन वाली सब्जी के साथ 30 दिन वाली पत्तेदार सब्जी भी। इससे किसान को हर महीने पैसा मिलता रहता है।
लागत कम, मुनाफा ज्यादा एक बार की जुताई, सिंचाई और खाद से 3-4 फसल। एकल फसल की तुलना में किसानों की आय में 2 से 3 गुना तक वृद्धि देखी गई है। कीट-रोग में कमी: फसल विविधता के कारण कीट एक जगह नहीं टिकते, जिससे दवा का खर्च बचता है।


छोटे किसानों के लिए वरदान :

आधा एकड़ जमीन वाले किसान भी प्रतिमाह लगभग 20-25 हजार रुपये तक कमा रहे हैं।डॉ. सिंह ने बुवाई के टिप्स भी दिए। उन्होंने कहा कि जुलाई में लगाई गई फसल से अक्टूबर तक 3 बार तुड़ाई संभव है। धूप चाहने वाली सब्जी को मेड़ पर लगाएं। बरसात में जलजमाव न हो इसके लिए 2 फीट ऊंची मेड़ बनाएं और पानी निकासी की उचित व्यवस्था रखें। डॉ. सौरभ दुबे, वैज्ञानिक, पौध संरक्षण ने बताया कि आज समय की मांग है कि इस तरह की खेती को किसानों के बीच बढ़ावा दिया जाए। वर्मी कम्पोस्ट + नीम खली जैसी जैविक खाद के उपयोग से लागत कम होगी और बाजार में अच्छा भाव मिलेगा। केंद्र के कृषि अभियंत्रण के वैज्ञानिक डॉ चेलपुरी रामलू ने बताया कि इस खेती में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली वह भी अपनाया जा सकता है जिससे पानी एवं आवश्यक पोषक तत्वों में 15 से 20% मात्रा कम करके उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

इस अवसर पर अफरोज आलम, परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षक एवं विकास संस्थान बेतिया ने बताया कि अमवा मजार पंचायत के अंतर्गत अमवा मझार चौराहा में संस्था के द्वारा बीज एवं उपादान उपलब्ध कराकर किसानों की आमदनी बढ़ाने हेतु प्रयास किया जा रहा है। वहीं नौतन प्रखंड के पकड़िया, बैकुंठवा एवं झंकरा में भी नाबार्ड के वित्तीय सहयोग से मल्टी लेयर फार्मिंग को बढ़ावा मिल रहा है। जीविका परियोजना से आए प्रिंस कुमार मैं उपस्थित प्रतिभागियों को नवीनतम तकनीकियों को अपने खेती में समाहित कर कार्य करने का सलाह दिया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे और उन्होंने केंद्र परिसर पर लगाए गए मल्टीलेयर मॉडल का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर केंद्र के शैलेंद्र कुमार, कमलेश कुमार, मनोज कुमार, शंभू कुमार एवं मुन्ना कुमार आदि उपस्थित थे।

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