विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रख्यात पर्यावरणविद् और प्रकृति प्रेमी पं०भरत उपाध्याय ने कहा कि विश्व गौरैया दिवस तो इन्हें भूलने वाले को याद दिलाने के लिए आता है! वास्तव में जो प्रकृति प्रेमी हैं वे इनकी सुरक्षा के लिए अनवरत प्रयत्नशील रहते हैं। उन्होंने कहा कि हमें उस छोटे किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण पक्षी गौरैया को जो कभी हमारे घरों आंगनों और खेतों में सहज रूप से दिखाई देती थी, वह केवल एक साधारण पक्षी नहीं है, बल्कि हमारे पर्यावरण संतुलन की अनिवार्य कड़ी है। दुर्भाग्यवश शहरीकरण और प्रदूषण तथा आधुनिक जीवन शैली और प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने से इनकी संख्या में निरंतर कमी आई है। इनके संरक्षण हेतु सामूहिक प्रयास अति आवश्यक है। यह कीट नियंत्रण में सहायक होती है, फसलों की रक्षा करती है और हमारे परिवेश को जीवंत बनाती है। इसकी चहचहाहट हमारे जीवन में आनंद और शांति का संचार करती है।

जब गौरैया जैसे प्रजातियां समाप्त हो जाएगी तो इसका प्रतिकूल प्रभाव हमारे पर्यावरण पर पड़ेगा। घरों में फुदकने वाली गौरैया अब बहुत कम दिखती है, गौरैया पक्षी का स्वभाव ऐसा है जो बिल्कुल मानव जीवन से जुड़ा है। घरों में बिखरे अनाज के दाने खाते हुए कभी यह हर घर में दिखाई देती थी, लकड़ी से बने घरों में आसानी से यह घोंसला बनाती रही है । किंतु समय के बदलाव के साथ इसकी संख्या घटती जा रही है, इसलिए गौरैया को यदि हम अपने घरों और बागीचों में पानी और दाना उपलब्ध करायें और वृक्षारोपण को बढ़ावा दें तो इनको संरक्षित कर सकते हैं।
विद्वान शिक्षक एवं प्रकृति प्रेमी नैतिक जागरण मंच के सचिव पंडित निप्पू पाठक ने पूर्व प्राचार्य को गौरैया के संरक्षण के लिए बॉक्स और वृक्ष भेंट करते हुए कहा कि इनकी सुरक्षा सिर्फ पर्यावरण की आवश्यकता ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक जिम्मेदारी है।अत: गौरैया के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण सृजन में सभी को सहयोग करना चाहिए।






