मंगलवार को संध्या अर्घ्य तथा बुधवार को प्रातः अर्घ्य देंगे व्रती
विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
लोक आस्था के महापर्व चैती छठ महाव्रत को लेकर व्रती एवं श्रद्धालू तैयारी में लगे हैं।
व्रतियों द्वारा हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को चैती छठ का पर्व श्रद्धा व भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है जिसमें श्रद्धालु निर्जला उपवास के साथ कठोर नियमों का पालन करते हुए सूर्य देव को संध्या और प्रातःकाल अर्घ्य अर्पित करते हैं। स्थानीय निवासी व्रती आरती देवी ने कहा कि अपने परिवार की सुख-समृद्धि, पति व संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए यह व्रत रखते हैं।
शिक्षक सुनिल कुमार ने कहा कि मान्यता है कि छठी मैया की सच्चे मन से पूजा करने से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और परिवार में खुशहाली आती है। लोक आस्था का यह व्रत शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है।

चैती छठ की तिथियों को लेकर कई लोगों के मन में भ्रम है। चार दिवसीय अनुष्ठान नहाय खाय के साथ शुरु होकर पारण के साथ समाप्त होगा। इस वर्ष 2026 में 22 मार्च रविवार को नहाय-खाय, 23 मार्च सोमवार को खरना, 24 मार्च मंगलवार को संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य) तथा 25 मार्च बुधवार को उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य) देंगे तथा पारण के साथ चार दिवसीय महाव्रत का समापन होगा। वहीं संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त) 24 मार्च मंगलवार को शाम 6:40 बजे तथा उषा अर्घ्य (सूर्योदय) 25 मार्च बुधवार को सुबह 5:47 बजे होगा।






