विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
मधुबनी, पूर्व प्रधानाचार्य पंडित विंध्यवासिनी प्रसाद त्रिपाठी के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में वृंदावन से पधारे सुविख्यात कथा वाचक पंडित राजेश तिवारी महाराज के मुखारविंद से अद्भुत कथामृत का पान कर स्थानीय श्रद्धालु श्रोता अहमद देवान ने व्यास जी को भावपूर्वक माला पहनाकर स्वागत किया। उद्धव प्रसंग एवं सुदामा कृष्ण के मित्रता की कथा से भावुक अहमद देवान ने कहा कि इस पाक रमजान के महीने में पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय और धीरेंद्र मणि त्रिपाठी का शुक्रगुजार हूं कि इनके प्रेरणा से रोज कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
कथा व्यास पंडित राजेश तिवारी महाराज जी ने कहा कि मुझे गर्व है कि अब तक की सम्पूर्ण कथा सार्थक रही, क्योंकि जब जीव हिंदू मुसलमान से ऊपर उठता है तभी इंसानियत जगती है और वह विशुद्ध इंसान बन जाता है।अहमद जी का रोज कथा में आना, यह ठाकुर जी की कृपा और पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय जी के प्रेरणा का फल है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में एक बड़ी विलक्षण गाँठ पड़ गयी है और यह ग्रंथि वहाँ है, जहाँ जड़ के द्वारा चेतन बँँध गया है। जीव चेतन है, क्योंकि यह तो ईश्वर का ही अंश है, ईश्वर या ब्रह्म से अभिन्न है। इसलिए ब्रह्म के जो लक्षण हैं, वे जीव में विद्यमान हैं, परन्तु यदि व्यक्ति के जीवन पर दृष्टि डालें तो ऐसा लगता है कि ईश्वर या ब्रह्म का कोई लक्षण उसके जीवन में दिखायी नहीं दे रहा है।
ईस्वर अंस जीव अबिनासी।
चेतन अमल सहज सुख रासी।।
सो मायाबस भयउ गोसाईं।
बँध्यो कीर मरकट की नाई।
जड़ चेतनहि ग्रंथि परि गई।
जदपि मृषा छूटत कठिनाई।।
इस अवसर पर पंडित अजय पांडेय, यज्ञ आचार्य सत्य प्रकाश दुबे,श्री निवास मणि, राधे मणि,निलेश त्रिपाठी, रितेश त्रिपाठी, दुर्गेश त्रिपाठी,शैलेश त्रिपाठी, अनिल त्रिपाठी, नित्यानंद जी, देवेंद्र उपाध्याय, गंगेश्वर यादव, उपेंद्र निषाद, दिनेश कुमार गुप्ता,राजेश कुशवाहा, योगेश्वर उपाध्याय, राहुल यादव सहित हजारों लोग उपस्थित होकर कथामृत पान किया।






