बाल्मीकि नगर से नन्दलाल पटेल की रिपोर्ट
बिहार का कश्मीर कहे जाने वाले में इन दिनों पर्यटन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। यहां की अनुपम प्राकृतिक छटा, जल–जंगल–पहाड़ और वन्यजीवों को देखने के लिए देश-विदेश से प्रतिदिन सैकड़ों सैलानी पहुंच रहे हैं। बिहार सरकार की ओर से विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के लिए शैक्षणिक परिभ्रमण योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यहां भ्रमण के लिए पहुंच रहे हैं। बुधवार की सुबह में संचालित एकलव्य कोचिंग सेंटर के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने वन भ्रमण के तहत जंगल सफारी का आनंद लिया। सफारी के दौरान बच्चों को जंगल में उछल-कूद करते हिरण, अटखेलियां करता भालू तथा गौर का झुंड दिखाई दिया। वन्यजीवों को इतने करीब से देखकर बच्चे उत्साह से झूम उठे। हालांकि बाघ का दीदार नहीं हो सका, लेकिन अन्य जंगली जीवों को देखकर बच्चों की यात्रा यादगार बन गई। कोचिंग संस्थान के एचडी आरपी सिंह ने बताया कि बच्चे जंगल सफारी को लेकर बेहद उत्साहित थे। उन्होंने कहा कि भले ही बाघ नजर नहीं आया, लेकिन अन्य वन्यजीवों को देखना भी बच्चों के लिए रोमांचकारी अनुभव रहा और हमारी यात्रा सफल रही।
वाल्मीकि आश्रम तक किया पैदल मार्च
जंगल सफारी के बाद छात्र-छात्राएं ऐतिहासिक के लिए पैदल ही रवाना हुए। यहां लव-कुश की जन्मस्थली, महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि और माता सीता के पाताल गमन स्थल का भ्रमण किया। आश्रम परिसर में घोड़ा बांधने वाला खंभा, हवन स्थली और प्राचीन सिलवट्टा देखकर बच्चे आश्चर्यचकित रह गए। आश्रम में मौजूद नेपाल के नागरिकों से भी बच्चों ने कई ऐतिहासिक और धार्मिक जानकारियां प्राप्त कीं।
सेल्फी प्वाइंट बना आकर्षण का केंद्र
जंगल कैंप में वन विभाग द्वारा बाघ और हिरण के प्रतिरूप स्थापित कर सेल्फी प्वाइंट बनाया गया है, जो पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। छात्र-छात्राओं ने इको पार्क और कालेश्वर झूला का आनंद लेने के बाद सेल्फी प्वाइंट पर जमकर तस्वीरें खिंचवाईं और यादों को अपने कैमरे में कैद किया। शैक्षणिक भ्रमण के इस कार्यक्रम ने बच्चों को प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवों से रूबरू होने का अनूठा अवसर प्रदान किया।






