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22 गांवों में बिजली की आस, एमएलसी ने वन विभाग से मांगी एनओसी

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


पश्चिमी चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व क्षेत्र से सटे दोन इलाके के 22 गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन कर रहे हैं। इन गांवों में बिजली की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों, विशेषकर थारू जनजाति के परिवारों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर बिहार विधान परिषद में माननीय एमएलसी श्री भीष्म साहनी ने आवाज उठाई और वन विभाग से अविलंब एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी करने की मांग की।
उन्होंने सदन के माध्यम से कहा कि बिहार के विकास पुरुष माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के आसपास बसे दोन क्षेत्र के गांवों—जिनमें नौरंगिया दोन, बनकटवा दोन सहित कुल 22 गांव शामिल हैं—में ऑफ-ग्रिड एवं ऑन-ग्रिड बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से अब तक एनओसी जारी नहीं की गई है।
एमएलसी श्री साहनी ने कहा कि एनओसी के अभाव में बिजली से जुड़ा कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है, जिससे हजारों ग्रामीण अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सीमित है और लोग पंखा, मोबाइल चार्जिंग, टीवी तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इससे उनका सामाजिक और आर्थिक विकास भी बाधित हो रहा है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि थारू जनजाति के लोग वर्षों से विकास की मुख्यधारा से कटे हुए हैं। बिजली जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध होने से न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि स्वरोजगार, लघु उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।
श्री भीष्म साहनी ने सदन के माध्यम से मांग की कि वन विभाग जनहित को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र एनओसी जारी करे, ताकि दोन क्षेत्र के सभी 22 गांवों में बिजली की व्यवस्था बहाल की जा सके और वहां के लोग भी आधुनिक सुविधाओं से जुड़कर सम्मानजनक जीवन जी सकें।

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