Tuesday, February 10, 2026
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वाल्मीकिनगर क्षेत्र में फाइलेरिया दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए) की विधिवत शुरुआत

वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट

फाइलेरिया जैसे गंभीर रोग से लोगों को निजात दिलाने के उद्देश्य से वाल्मीकिनगर क्षेत्र में फाइलेरिया दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए) की विधिवत शुरुआत की गई। इस अभियान के तहत दो वर्ष से अधिक उम्र के सभी पात्र लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई जा रही है। इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजेश सिंह ने बताया कि फाइलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण और उन्मूलन के लिए यह अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका तय की गई है। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर दो वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को अपने सामने फाइलेरिया की दवा खिलाएंगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति दवा सेवन से वंचित न रह जाए। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर और दीर्घकालिक रोग है, जिसके परजीवी कई बार वर्षों तक शरीर में रहने के बावजूद लक्षण प्रकट नहीं करते। ऐसे में दवा का सेवन न सिर्फ रोग से बचाव करता है, बल्कि समाज को फाइलेरिया मुक्त बनाने में भी सहायक होता है। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाएगी। अभियान के तहत डीईसी (डाई-इथाइल कार्बामाजीन) एवं एल्बेंडाजोल की गोलियां दी जा रही हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं को पहले ही आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। जिले में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए टीमों का गठन कर लिया गया है।


इस अभियान की निगरानी जिलास्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नियमित रूप से मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ताकि अभियान में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। आशा कार्यकर्ता न सिर्फ दवा खिला रही हैं, बल्कि लोगों को इसके लाभ और सावधानियों के बारे में भी जागरूक कर रही हैं। खासतौर पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि लोग दवा का सेवन आशा के सामने ही करें।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे खाली पेट फाइलेरिया की दवा का सेवन न करें। कभी-कभी खाली पेट दवा खाने से जी मिचलाना, हल्का सिर दर्द या हल्का बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। साइड इफेक्ट शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवियों के मरने के कारण होते हैं और सामान्य रूप से थोड़े समय में स्वतः ठीक हो जाते हैं।
जानकारी के अनुसार, दो से पांच वर्ष के बच्चों को डीईसी की एक टैबलेट और एल्बेंडाजोल की एक टैबलेट दी जाएगी। वहीं छह से 14 वर्ष के बच्चों को डीईसी की दो टैबलेट और एल्बेंडाजोल की एक टैबलेट खिलाई जाएगी। 14 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को डीईसी की तीन टैबलेट और एल्बेंडाजोल की एक टैबलेट देने का निर्देश है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से इस अभियान में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन तभी संभव है, जब समाज का हर व्यक्ति जागरूक होकर दवा का सेवन करे। यह अभियान न सिर्फ व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए, बल्कि पूरे समाज को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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