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बेतिया के सेमरा मदरसा में ऐतिहासिक जलसा, 481 हाफिजों की हुई दस्तारबंदी

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


बेतिया (पश्चिम चंपारण) शब-ए-बारात से पूर्व पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय बेतिया स्थित बिहार के प्रसिद्ध और सबसे बड़े इस्लामिक शिक्षण संस्थान मदरसा जामिया इस्लामिया कुरआनियां सेमरा में एक भव्य जलसे एवं दस्तारबंदी समारोह का आयोजन किया गया। वर्ष 1881 में स्थापित इस ऐतिहासिक मदरसे के 24वें दस्तारबंदी कार्यक्रम में कुल 481 हाफिज-ए-कुरआन की दस्तारबंदी की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मदरसा के एकेडमिक इंचार्ज मुफ़्ती जुनेद कासमी ने की, जबकि पूरे समारोह की निगरानी नाजिम सफीउद्दीन द्वारा की गई। इस मौके पर बिहार के विभिन्न जिलों के साथ-साथ सीमावर्ती उत्तर प्रदेश और नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
तीन चरणों में संपन्न हुए इस भव्य आयोजन के पहले चरण में हिफ़्ज़-ए-कुरआन मुकम्मल करने वाले छात्रों के परीक्षा परिणाम सुनाए गए। शैक्षणिक सत्र 2025–26 में सफल छात्रों को अनिसुर रहमान और शफीउद्दीन साहब ने सनद प्रदान की।


दूसरे चरण में 481 फ़ारिग़ीन छात्रों की दस्तारबंदी देश के प्रतिष्ठित उलेमाओं के कर-कमलों द्वारा की गई। वहीं तीसरे चरण में इमारत-ए-शरिया पटना के पूर्व नाजिम मुफ़्ती जुनेद कासमी ने प्रभावशाली बयान देते हुए समाज की बहू-बेटियों और महिलाओं को उनकी इज़्ज़त, आबरू और ईमान की हिफाज़त को लेकर अहम नसीहतें दीं।
कार्यक्रम का संचालन मदरसा के उस्ताद मुफ़्ती आबिद ने किया। मदरसा के प्रिंसिपल अधिकारी कारी बशीर अहमद मज़ाहिरी ने सभी मेहमानों और छात्रों का सम्मान करते हुए दुआओं से नवाज़ा।
इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि पटना निवासी मात्र 8 वर्षीय मोहम्मद अयान ने हाफिज-ए-कुरआन की सनद हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया और सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। दूर-दराज़ से आए मेहमानों ने छात्रों को अंगवस्त्र और फूल-मालाएं पहनाकर सम्मानित किया तथा उन्हें पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद (स.अ.) के बताए मार्ग पर चलकर इंसानियत भरी ज़िंदगी जीने की अपील की।

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