दुषित और बासी भोजन से करें परहेज।
अनिल कुमार शर्मा मझौलिया पश्चिम चंपारण।
इन दिनों बरसात का मौसम है। बरसात के बाद तेज धूप निकलने से पर्यावरण मैं व्यापक उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बारिश होने के बाद उमस और गर्मी बढ़ जा रही है जिसका कुप्रभाव मानव के स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। चक्कर आना उल्टी आना जी मिचलाना तथा बेचैनी होने कि शिकायत आम हो गई है। मधुमेह के रोगियों की स्थिति भी काफी दयनीय हो रही है। शरीर से पसीना निकलना और बार-बार प्यास लगने की स्थिति सामने देखी जा रही है।
उतार चढ़ाव वाले मौसम में मसालेदार और गरिष्ठ भोजन करने से पेट संबंधी शिकायतें उभर कर आई है।
इस संदर्भ में प्रसिद्ध चिकित्सक डॉक्टर एस
टी नबी ने बताया कि बदलते मौसम में अपने सेहत का ख्याल रखना अत्यंत जरूरी है। वरिष्ठ और ज्यादा मसालेदार भोजन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। बासी भोजन और अध पका भोजन मानव स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव डालता है। दुषित जल पीना जान जोखिम में डालने के बराबर होता है। हम लोगों को इन हानिकारक चीजों से बचना चाहिए। हल्के और सुपाच्य भोजन का सेवन करना चाहिए। शुद्ध जल पीना चाहिए। भोजन में साग सब्जियां और फलों का सेवन ज्यादा होनी चाहिए।
बदलते मौसम में साफ सफाई और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। डायबिटीज के मरीजों को तेज धूप से बचना अत्यंत जरूरी है।






