सड़क और पुल के अभाव में लक्ष्मीपुर रमपुरवा पंचायत के चकदहवा समेत चार गांव के हजारों ग्रामीणों के लिए मानसून का हर वर्ष मुसीबत
वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बगहा-2 प्रखंड के सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं का संकट बरकरार है। सड़क और पुल के अभाव में लक्ष्मीपुर रमपुरवा पंचायत के चकदहवा समेत चार गांवों के हजारों ग्रामीणों के लिए मानसून हर वर्ष मुसीबत लेकर आता है। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ते ही इन गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट जाता है और पूरा इलाका टापू में तब्दील हो जाता है। वाल्मीकिनगर से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित चकदहवा गांव इस समस्या की गंभीरता को बयां करता है। गांव तक पहुंचने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही नाले पर पुल। ग्रामीणों को करीब दो किलोमीटर तक जंगल और पगडंडी के रास्ते कीचड़ व पानी के बीच से गुजरकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। भेड़िहारी तक सड़क होने के बाद भी उसके आगे का सफर बारिश के दिनों में बेहद जोखिम भरा हो जाता है।
गंडक के रुख बदलने से सैकड़ों एकड़ जमीन नदी में समाई
चकदहवा गंडक नदी के दियारा क्षेत्र में स्थित है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश और गंडक बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद यहां बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ जाता है। चकदहवा, झंडू टोला, बिन टोली समेत कई निचले इलाकों में पानी घुस जाता है। कई परिवारों को घर के भीतर मचान बनाकर रहने को मजबूर होना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब एक दशक पहले तक गंडक नदी गांव से लगभग आधा किलोमीटर दूर बहती थी। उस समय सैकड़ों परिवार खेती-किसानी पर निर्भर थे और क्षेत्र में अच्छी पैदावार होती थी। लेकिन धीरे-धीरे नदी का रुख गांव की ओर बढ़ा और देखते ही देखते सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में समा गई। कटाव रोकने के लिए ग्रामीण लगातार मांग उठाते रहे, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका।
एंबुलेंस तक नहीं पहुंचती, बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति और गंभीर हो जाती है। गांव में स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने के साथ सड़क की सुविधा भी नहीं है। ऐसे में एंबुलेंस का पहुंचना मुश्किल हो जाता है। गंभीर मरीजों को चारपाई पर लादकर कई किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। वहीं, पानी और कीचड़ के कारण बच्चों का विद्यालय पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।

प्रशासन की ओर से बाढ़ के समय राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में सामुदायिक किचन चलाकर राहत देने का प्रयास किया जाता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि राहत से ज्यादा जरूरी स्थायी समाधान है। गुलाब अंसारी, छट्ठू राय, नंदू राम, मुकेश राम, इस्लाम मियां, भीमराम, ज्ञानचंद खटीक, छत्तर राय और पट्टू राम ने प्रशासन से तत्काल नाव की व्यवस्था कराने के साथ सड़क, पुल और प्रभावी कटावरोधी कार्य कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक आवागमन और कटाव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक हर मानसून उनके लिए संकट बनकर आता रहेगा।






