नेपाल में तबाही के बाद अब अगले तीन दिनों का अलर्ट, झील टूटने पर गंडक नदी में अचानक बढ़ सकता है पानी
विजय कुमार शर्मा बगहा / नन्दलाल पटेल वाल्मिकीनगर पश्चिम चंपारण
वाल्मीकिनगर नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अभी पूरी तरह सामान्य भी नहीं हुए हैं कि हिमालयी क्षेत्र में एक बार फिर बड़े खतरे की चेतावनी सामने आई है। नेपाल और चीन ने अगले तीन दिनों के दौरान संभावित बाढ़ को लेकर अलर्ट जारी किया है। मलबे के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होने से सीमा के दोनों ओर कई स्थानों पर झीलनुमा जलाशय बन गए हैं।

इनका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यदि किसी जलाशय की प्राकृतिक रोकथाम टूटती है तो अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आने से बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। चीन की ओर से जताई गई आशंका के मुताबिक अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर पानी इन झीलों में पहुंच सकता है। पानी का दबाव बढ़ने और झील के टूटने की स्थिति में तेज रफ्तार से पानी नीचे की ओर बह सकता है। इसका असर नेपाल के निचले इलाकों के साथ-साथ भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों और गंडक नदी के जलस्तर पर भी पड़ने की आशंका है।
मलबे से रुका नदी का रास्ता, बन गई झील
नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार बाढ़ और भूस्खलन के बाद बड़ी मात्रा में मलबा नदी के रास्ते में जमा हो गया है। इससे नदी का प्रवाह बाधित हुआ और पीछे की ओर पानी जमा होकर झील का रूप लेने लगा है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने अचानक झील टूटने की आशंका बढ़ा दी है। इसी को लेकर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। लोगों से नदी के किनारे जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है। यात्रियों तथा राहत-बचाव कार्य में लगे लोगों को भी जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर भी पड़ सकता है असर
नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में किसी प्राकृतिक झील के टूटने अथवा अचानक बड़ी मात्रा में पानी गंडक नदी की ओर आने की स्थिति में इसका प्रभाव वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज पर भी पड़ सकता है। अचानक पानी बढ़ने पर बराज के अपस्ट्रीम में जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिसके बाद बराज के फाटकों के संचालन और डाउनस्ट्रीम में पानी के प्रवाह की स्थिति पर विशेष निगरानी आवश्यक हो जाएगी।

हालांकि, बराज पर वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि नेपाल की ओर से कितनी मात्रा में पानी अचानक गंडक नदी में पहुंचता है, पानी का प्रवाह किस दिशा में रहता है और उस समय नदी का मौजूदा जलस्तर कितना है। ऐसी स्थिति में वाल्मीकिनगर के साथ-साथ गंडक नदी के किनारे बसे पश्चिम चंपारण के निचले इलाकों में भी प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ सकती है।यदि अचानक पानी का बड़ा प्रवाह गंडक में आता है तो नदी किनारे बसे गांवों, दियारा क्षेत्रों, खेतों और निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की आशंका रहेगी। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए समय रहते चेतावनी और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण होगा।
तबाही से उबर नहीं पाया नेपाल, सामने आया नया संकट
नेपाल में इसी सप्ताह आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर जनजीवन को प्रभावित किया है। कई इलाकों में सड़क, पुल और आवागमन की व्यवस्था बाधित हुई है। ऐसे समय में नए संभावित बाढ़ संकट की चेतावनी ने नेपाल के साथ भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार मलबे से बनी प्राकृतिक झीलों में पानी का दबाव लगातार बढ़ने पर अचानक जलनिकासी हो सकती है। ऐसी स्थिति में नीचे की ओर बसे इलाकों में बहुत कम समय में भारी मात्रा में पानी पहुंच सकता है। इसलिए नेपाल के साथ-साथ वाल्मीकिनगर गंडक बराज और गंडक नदी के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखना जरूरी है।

फिलहाल खतरा टला नहीं है। नेपाल से आने वाले पानी और संभावित प्राकृतिक झीलों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन की ओर से नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, नदी के समीप नहीं जाने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों की ओर जाने की अपील की जा रही है। नेपाल में बनने वाली इन प्राकृतिक झीलों की स्थिति अब सिर्फ नेपाल तक सीमित चिंता नहीं है। यदि इनमें से किसी झील का जलाशय टूटता है, तो उसके बाद गंडक नदी के रास्ते आने वाला पानी भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों और वाल्मीकिनगर गंडक बराज के लिए भी महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है। इस संदर्भ में नेपाल के जिलाधिकारी से कई बार संपर्क करने की प्रयास की गई लेकिन आपात स्थितियों के कारण उनके आधिकारिक बयान नहीं मिल पाया है






