बाघ के हमले में किसान की मौत के बाद,वन विभाग की निगरानी में हो रही फसलों की निगरानी

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वाल्मीकि नगर से नन्दलाल पटेल की रिपोर्ट

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे भेड़ीहारी इलाके में बाघ के हमले में किसान की मौत के बाद खेत अब भी खौफ के साये में हैं. खेती का मौसम होने के बावजूद किसान अकेले खेत जाने से बच रहे हैं और वन विभाग की निगरानी में ही फसलों की देखभाल कर रहे हैं. वाल्मीकिनगर के रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि संवेदनशील खेतों और सरेह के आसपास वनकर्मियों की लगातार गश्त जारी है. ट्रैकिंग टीमें बाघ की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं, ताकि उसकी आवाजाही वाले क्षेत्रों की समय रहते पहचान कर ग्रामीणों को सतर्क किया जा सके.


वन विभाग ने किसानों से समूह में खेत जाने, सुबह-शाम के संवेदनशील समय से बचने और झाड़ियों व ऊंची फसल वाले हिस्सों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. ग्रामीणों को लगातार जागरूक करने के लिए लाउडस्पीकर से भी एहतियाती संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं.
बाघ की तलाश में ड्रोन कैमरों और गश्ती दलों की मदद ली जा रही है.

विभाग का लक्ष्य बाघ की सटीक लोकेशन का पता लगाकर उसे सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर वापस भेजना है. ग्रामीणों का कहना है कि फसल की देखभाल टालना संभव नहीं है, लेकिन हर बार खेत पहुंचना अब जोखिम भरा लगता है. ऐसे में वनकर्मियों की मौजूदगी उन्हें कुछ हद तक भरोसा देती है. वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक बाघ की गतिविधियां पूरी तरह जंगल तक सीमित नहीं हो जातीं, तब तक अतिरिक्त सतर्कता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय है. फिलहाल भेड़ीहारी में खेती और सुरक्षा साथ-साथ चल रही हैं.

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