Sunday, August 2, 2026
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जहां गांधी ने शिक्षा का दीप जलाया, वहां आज भी कॉलेज का इंतजार- अनिरुद्ध चौरसिया

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार

इतिहास कभी-कभी वर्तमान से सवाल पूछता है। सवाल यह कि जिस भितिहरवा की धरती पर महात्मा गांधी ने शिक्षा, स्वावलंबन और सामाजिक परिवर्तन का संदेश दिया, क्या उसी भूमि पर आज भी उच्च शिक्षा के लिए एक कॉलेज का सपना अधूरा रहना चाहिए? भितिहरवा गांधी आश्रम के समीप श्रीरामपुर गांव के गांधी विचारक अनिरुद्ध प्रसाद चौरसिया पिछले लगभग 30–35 वर्षों से माता कस्तूरबा गांधी के नाम पर एक उच्च विद्यालय बनवाने की मांग करते आ रहे हैं। समय बदला, सरकारें बदलीं, योजनाएं बदलीं, लेकिन उनकी मांग फाइलों के पन्नों से आगे नहीं बढ़ सकी।अब जब बिहार सरकार हर प्रखंड में एक डिग्री कॉलेज स्थापित करने की बात कर रही है, तो भितिहरवा के लोगों की उम्मीद फिर जागी है। उनका कहना है कि अगर किसी स्थान पर माता कस्तूरबा गांधी डिग्री कॉलेज बनना चाहिए, तो वह भितिहरवा गांधी आश्रम के आसपास ही होना चाहिए। आखिर यह वही भूमि है, जहां गांधी ने शिक्षा को आजादी की सबसे बड़ी ताकत बताया था।

व्यंग्य यही है कि देशभर में गांधी जयंती पर भाषणों की कमी नहीं होती, प्रतिमाओं पर मालाएं भी खूब चढ़ती हैं, लेकिन जहां गांधी के विचारों ने आकार लिया, वहां आज भी युवा उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर भितिहरवा में गांधी और कस्तूरबा के नाम पर एक डिग्री कॉलेज स्थापित हो जाए, तो यह केवल एक इमारत नहीं होगी, बल्कि राष्ट्रपिता के विचारों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इससे सीमावर्ती क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राओं, विशेषकर बेटियों को घर के पास गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा।अब देखना यह है कि सरकारी फाइलें इतिहास का सम्मान करती हैं या फिर यह मांग भी वर्षों तक केवल आश्वासनों की धूल में दबी रहती है। क्योंकि भितिहरवा आज भी जैसे पूछ रहा है—”क्या गांधी केवल तस्वीरों में रहेंगे, या उनके सपनों को भी कभी जमीन मिलेगी?”

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