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काल के क्रूर हाथों से कोई नहीं बच सकता -पंडित भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज मधुबनी के पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने प्रिय छोटे गुरु और मां जैसी चाची के असामयिक निधन पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि – किसी के जीवन का मूल्य उसकी लम्बाई साल से नहीं, बल्कि उसके किए गए कार्यों और योगदान से आंका जाता है। परसों गुरु पुत्र सोलह वर्षीय छोटे महराज जी का पीजीआइ में बैकुंठधाम जाना हृदय विदारक तथा गुरुकुल पर वज्रपात है।

महाराज जी के चेहरे पर जो चमक थी,उससे उम्मीद थी की आंखें खुलेंगी! मगर काल के क्रूर विधान ने उन्हें हमसे छीन लिया। ऐसे में प्रेरणा देने वाले ,संदेश देने वाले, उच्चारण सीखाने वाले, मार्ग दिखाने वाले, व्यवहार सीखाने वाले और तत्वबोध कराने वाले- ये 6 प्रकार के गुरु बताए गए हैं। हमें अपनी छोटी सी जिन्दगी में इनसे सीख लेनी चाहिए। जीवन है तो मृत्यु भी है, मृत्यु इस संसार का अटल और और शाश्वत सत्य है! जिसे कोई टाल नहीं सकता है,अंत कितना भयावह होगा यह किसी को नहीं मालूम।

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