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हनुमान चालीसा केवल मंत्र नहीं है—यह मानसिक कवच है-पंडित भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय के निज निवास स्थित शुभाश्रम में श्री हनुमान जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर हनुमान चालिसा की विशेषता बताते हुए पूर्व प्राचार्य ने कहा कि –
“महावीर जब नाम सुनावै” का अर्थ है —जब मन में हनुमानजी का नाम जागता है, तो भीतर की शक्ति भी जाग जाती है।
जब हम हनुमानजी का स्मरण करते हैं—उनकी निडरता, उनका चरित्र,उनका विवेक, उनकी विनम्रता और उनकी अपार शक्ति —हमारे भीतर सक्रिय हो जाती है।और जब मन मजबूत होता है, तो आजके ये आधुनिक भूत-पिशाच—जलन, तुलना, तनाव, अपमान, नफरत, आत्म-संदेह हमारे पास आने की हिम्मत नहीं करते।


क्योंकि यह पंक्ति “बाहरी दानव” नहीं हटाती, यह भीतरी दानवों को बेअसर करती है।
हनुमान चालीसा के पढ़ने से:मन को स्थिरता मिलती है। बाहरी नकारात्मकता का असर कम होता है।आत्मविश्वास बढ़ता है। भीतरी राक्षस भागने लगते हैं।
निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। क्योंकि मन स्पष्ट होता है।
क्रोध और तनाव कम होता है। हनुमानजी का नाम अपने आप शांति लाता है।सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है। जैसा मन, वैसा जीवन।आज दुनिया शोर से भरी है—सोशल मीडिया की तुलना, जजमेंट, कटाक्ष, जलन,हेट कमेंट्स, आदि ।लेकिन जब आप भीतर महावीर को जगा देते हैं, तो ये सभी नकारात्मक शक्तियाँ अपना रास्ता बदल देती हैं। वे आपके पास आना बंद कर देती हैं।
हनुमान चालीसा सिर्फ़ डर भगाने का मंत्र नहीं। यह अंदर बसे दानवों को शांत करने वाला विज्ञान है।अगर आप रोज़ हनुमानजी का स्मरण करें, उनका नाम लें, उनकी ऊर्जा से जुड़ें तो कोई नकारात्मक शक्ति, कोई बुरा विचार, कोई जलन, कोई अपमान, कोई तनाव —आपके पास टिक ही नहीं सकता।
उपस्थित लोगों ने प्रिया प्रियदर्शनी के सोहर गीतों पर भावपूर्ण नृत्य करते हुए श्री हनुमान जन्मोत्सव का शोभा बढ़ाया।

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