विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले में पुलिसकर्मियों ने सूरत के कारोबारी से कार में ले जाए जा रहे हवाला के एक करोड़ रुपये पकड़े, लेकिन 20 लाख की रिश्वत लेकर छोड़ दिया। यह मामला सामने आया तो मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक को बदलने के साथ ही थाना प्रभारी समेत चार पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इस मामले को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया कि गुना जिले में तलाशी के दौरान मिली नकद राशि में हेरफेर के मामले में पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी की भूमिका को यथोचित न मानते हुए पुलिस अधीक्षक पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय में पदस्थ कर दिया है। मामला गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात का है। धरनावदा थाना की रुठियाई पुलिस चौकी क्षेत्र में नेशनल हाईवे-46 पर पुलिस वाहन चेकिंग कर रही थी। इस दौरान पुलिस ने एक कार को रोका। इसमें लगभग एक करोड़ रुपये नगद मिले। एक घंटे तक मोलभाव चलता रहा, उसके बाद पुलिसवालों ने 20 लाख रुपये लेकर वाहन को छोड़ दिया।
शनिवार को सूरत में कार्यरत गुजरात के एक आईपीएस अधिकारी का फोन वरिष्ठ अधिकारी को आया। उसके बाद पुलिसवालों ने रिश्वत की रकम लौटा दी, तब तक वरिष्ठ अधिकारियों तक मामला पहुंच चुका था, ऐसे में जांच शुरू हुई। जांच के लिए ग्वालियर रेंज के डीआइजी अमित सांघी शनिवार रात ही गुना पहुंच गए। आधी रात तक मामले की प्रांरभिक जांच के बाद उन्होंने पुलिसकर्मियों का आचरण संदिग्ध पाए जाने पर धरनावदा थाना प्रभारी प्रभात कटारे, रुठियाई चौकी प्रभारी साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिकरवार और आरक्षक सुंदर रमन को निलंबित कर दिया। शिवपुरी जिले के करैरा अनुविभाग के एसडीओपी आयुष जाखड़ को आगे की जांच दी गई है। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 में गुना जैसा ही मामला मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में भी सामने आया था। यहां जिला पुलिस ने एक कार से हवाला की तीन करोड़ रुपये की नकदी पकड़ी लेकिन रिकॉर्ड में 1.45 करोड़ ही दिए गए। लेन-देने की बात भी प्रमाणित हुई, जिसके आधार पर तत्कालीन एसडीओपी पूजा पांडे सहित 10 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर प्रकरण दर्ज किया गया। कुछ पुलिसकर्मी जेल में हैं।






