38.64 लाख की लागत से तैयार होने वाले एयरपोर्ट के लिए आवश्यक 18 एकड़ भूमि में 6 एकड़ सरकारी भूमि उपलब्ध है
वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
पर्यटन नगरी बाल्मीकि और सीमावर्ती क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत वाल्मीकिनगर एयरपोर्ट निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गुरुवार की दोपहर जिला प्रशासन के अपर समाहर्ता राजीव रंजन सिन्हा, डीसीएलआर अंजलिका कृति, जिला भू अर्जन पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी बिट्टू कुमार राम, अपर जिला भू अर्जन पदाधिकारी राकेश सिंह व भाग्य नारायण राय वाल्मीकिनगर पहुंच जन प्रतिनिधियों एवं रैयतदारों के साथ एयरपोर्ट पर बैठक कर विचार विमर्श किया। इस बाबत अपर समाहर्ता राजीव रंजन सिंह ने बताया कि बिहार सरकार द्वारा एयरपोर्ट निर्माण के लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है। 38.64 लाख की लागत से तैयार होने वाले एयरपोर्ट के लिए आवश्यक 18 एकड़ भूमि में 6 एकड़ सरकारी भूमि उपलब्ध है। इस संबंध में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों और स्थानीय रैयतदारों के साथ बैठक कर भूमि अधिग्रहण करने के बारे में आवश्यक जानकारी साझा की तथा जमीन अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वाल्मीकिनगर एयरपोर्ट के निर्माण के लिए 18 एकड़ भूमि की अतिरिक्त आवश्यकता बताई गई है। इसमें 12 एकड़ भूमि टर्मिनल भवन के निर्माण के लिए तथा 6 एकड़ भूमि रनवे के विस्तार के लिए जरूरी होगी। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित क्षेत्र में कुछ सरकारी जमीन भी शामिल है, जबकि शेष जमीन स्थानीय रैयतों से ली जानी है।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2014 में सरकार द्वारा बनाई गई सतत लीज नीति के तहत ही जमीन ली जाएगी। इस प्रक्रिया में रैयतों से जमीन की रजिस्ट्री कराई जाती है, और जमीन सरकार के नाम चली जाती है। इसके बाद रैयतों को चेक के माध्यम से तुरंत भुगतान कर दिया जाता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में जमीन की कीमत सर्किल रेट से चार गुना तक दी जाएगी, जिससे जमीन देने वाले रैयतों को उचित मुआवजा मिल सके।
अधिकारियों ने रैयतों को यह भी बताया कि जमीन देने के लिए उन्हें अपने जमीन से जुड़े दस्तावेज और स्वामित्व से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। सभी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और भुगतान भी उसी वक्त कर दिया जाएगा।
रैयतदारों ने जमीन के बदले जमीन देने की उठाई मांग
बैठक के दौरान कई रैयतों ने जमीन के बदले जमीन देने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि यदि उनकी जमीन एयरपोर्ट निर्माण के लिए ली जाती है तो उन्हें कहीं अन्यत्र जमीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनके आजीविका के साधन प्रभावित न हों। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने इस मांग को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि वर्तमान नीति में जमीन के बदले जमीन देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए केवल निर्धारित मुआवजा राशि ही दी जा सकेगी।
इस दौरान रैयतों ने सर्किल रेट में अंतर का मुद्दा भी उठाया।
एमवीआर के तहत दिया जाएगा मुआवजा
रैयतों के अनुसार लक्ष्मीपुर रमपुरवा पंचायत और वाल्मीकिनगर पंचायत में जमीन के एमबीआर (न्यूनतम मूल्य) की दरों में काफी अंतर है। रैयतों का कहना था कि इस अंतर के कारण मुआवजा राशि में भी भारी फर्क पड़ेगा, जिससे कुछ किसानों को नुकसान हो सकता है। जबकि अधिकारियों ने एमवीआर के तहत भुगतान होने की बात बताई। अपर समाहर्ता राजीव रंजन सिंह ने बताया कि, अगर रैयतदारों के सहमति से जमीन का रजिस्ट्री हो जाता है तो एक डिसमिल जमीन के मूल्य के चौगुना मूल्य दिया जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों ने रैयतों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा और सरकार की नीति के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। साथ ही उन्होंने सभी से सहमति बनाकर विकास कार्य में सहयोग करने की अपील की।
गौरतलब है कि वाल्मीकिनगर पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां एयरपोर्ट बनने से पर्यटन, व्यापार और आवागमन को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि एयरपोर्ट बनने से क्षेत्र के विकास के नए रास्ते खुलेंगे।






