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अध्यात्म और पर्यावरण का अटूट संबंध है -पं-राजेश जी महाराज

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


मधुबनी, पूर्व प्रधानाचार्य पंडित विंध्यवासिनी प्रसाद त्रिपाठी के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ में पहुंच कर प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं प्रकृति प्रेमी पूर्व प्राचार्य पंडित भरत उपाध्याय और श्रीनिवास मणि ने वृंदावन से पधारे सुविख्यात कथा वाचक पंडित राजेश तिवारी महाराज को अंग वस्त्र और बादाम का वृक्ष भेंट कर सम्मानित किया। इस तरह से आज की कथा में अध्यात्म को पर्यावरण से जोड़ते हुए
कथा व्यास पंडित राजेश तिवारी महाराज ने श्री हनुमान जी की विशेषता का वर्णन करते हुए कहा कि वह अमर हैं क्योंकि वह हमारी श्रुति, स्मृति, वचन, मनन में सदैव बने रहते हैं।

उनका वृक्षों तथा फल-फूल से अतिशय प्रेम है।मनुष्य है तो उसका मानस है। मानस है ,तो हनुमान हैं ,अविनाशी, अक्षय ऊर्जा युक्त हनुमान! वह जितेंद्रिय हैं ।उनका आत्म नियंत्रण, उनमें सूक्ष्म और स्थल का योग कर ऊर्जा का संचयन
करता है। हनुमान जी बगैर समय और ऊर्जा नष्ट किये बल और बुद्धि दोनों का प्रयोग कर समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हैं।
इस अवसर पर पंडित रामवृक्ष मणि,शीतांसु मणि, राधे मणि, सुनील मणि, निलेश त्रिपाठी, रितेश तिवारी, महेश्वर उपाध्याय, उपेंद्र मिश्रा, वासुदेव मणि, रविशंकर तिवारी,अहमद मियां, दिनेश कुमार गुप्ता सहित हजारों लोगों कथामृत का पान किया।

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