बाल्मीकि नगर से नन्दलाल पटेल की रिपोर्ट
वाल्मीकिनगर स्थित सभागार के मीटिंग हॉल में वन सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह, डीएफओ विकास कुमार अहलावत, सीएफ सत्यम कुमार, रेंजर सत्यम कुमार सहित अन्य वन अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं प्रखंड विकास पदाधिकारी बिड्डू कुमार राम भी बैठक में मौजूद थे। बैठक के दौरान तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने कहा कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल है। यहां बाघों के साथ-साथ कई दुर्लभ वन्यजीव और पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। इस समृद्ध जैव विविधता को बनाए रखने के लिए जंगलों में अवैध कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध, नियमित चौकसी और सघन पेट्रोलिंग व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। साथ ही वनकर्मियों को आधुनिक संसाधनों से लैस कर जंगलों की निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

वन अधिकारियों ने बताया कि वीटीआर में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को भी विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके तहत वीटीआर को बौद्ध सर्किट और रामायण सर्किट से जोड़ने की दिशा में पहल की जा रही है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ धार्मिक महत्व का भी अनुभव कर सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरैना धाम तक पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें वाल्मीकिनगर तक लाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। यदि यह योजना सफल होती है तो इससे क्षेत्र में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। बैठक में यह भी बताया गया कि वाल्मीकिनगर में बने कन्वेंशन सेंटर को पर्यटन की दृष्टि से अधिक सक्रिय बनाने की योजना है। इसके साथ ही वीटीआर में आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

वन्यजीवों के संरक्षण के लिए जंगलों में वाटर होल (जल स्रोत) विकसित करने पर भी विशेष बल दिया गया। गर्मी के मौसम में जंगलों में पानी की कमी होने पर वन्यजीवों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में उनकी प्यास बुझाने के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और नए वाटर होल बनाने की आवश्यकता बताई गई। अधिकारियों ने कहा कि यदि जंगल की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन बनाए रखा जाए, तो वाल्मीकि टाइगर रिजर्व न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में इको टूरिज्म का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। इसके लिए प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय लोगों के सहयोग से ठोस कदम उठाने की जरूरत है।






