वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
जल संसाधन विभाग द्वारा अतिक्रमित भूमि खाली कराने के लिए जारी किए गए नोटिस के बाद दुकानदारों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया है। विभाग की ओर से गोल चौक से लेकर तीन आरडी पुल चौक तक सड़क किनारे स्थित दुकानों और मकानों को सात दिनों के भीतर खाली करने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा के अंदर अतिक्रमित भूमि खाली नहीं करने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नोटिस मिलने के बाद से ही गोल चौक से तीन आरडी पुल तक वर्षों से दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले दुकानदारों के बीच भय और असमंजस का माहौल बना हुआ है। इसी के विरोध में सोमवार की सुबह सभी दुकानदारों ने एकजुट होकर अपनी दुकानें बंद कर दीं और जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय तथा बराज डिवीजन कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से मुलाकात की।
इस दौरान बड़ी संख्या में व्यापारी और गृहस्वामी कार्यालय परिसर में पहुंचे और उजाड़ अभियान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। व्यापारियों ने अधिकारियों से अनुरोध किया कि सिंचाई विभाग की भूमि पर वर्षों से बसे दुकानों और मकानों को नियमित करते हुए उन्हें आवंटित करने की व्यवस्था की जाए, ताकि उनके रोजगार और आशियाने पर संकट न आए।
व्यापारियों का नेतृत्व कर रहे अमित कुमार सिंह ने अपने सहयोगियों के साथ कार्यपालक अभियंता और अधीक्षण अभियंता से मुलाकात कर मामले का समाधान निकालने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि अचानक नोटिस जारी होने से सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कोई वैकल्पिक व्यवस्था या समाधान निकालना चाहिए।
इधर, जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता मोहम्मद जिलानी ने व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उन्हें स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई जल संसाधन विभाग पटना से जारी निर्देश के आधार पर की जा रही है। साथ ही पश्चिमी चंपारण के जिलाधिकारी की ओर से भी अतिक्रमण हटाने को लेकर सक्रियता दिखाई गई है, जिसके बाद सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिया गया है।
उन्होंने कहा कि विभाग की मंशा किसी को परेशान करना नहीं है। यदि कोई ऐसा रास्ता निकल सकता है जिससे स्थानीय लोग भी प्रभावित न हों और सरकारी भूमि भी खाली हो सके, तो इस पर व्यापारियों के सहयोग से विचार किया जाएगा।
वहीं गंडक बराज डिवीजन के कार्यपालक अभियंता मोहम्मद इकबाल अनवर ने बताया कि सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) द्वारा भारत-नेपाल सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाली सरकारी भूमि को सुरक्षा की दृष्टि से अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए गृह मंत्रालय को पत्र भेजा गया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने बिहार सरकार को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उसी के तहत जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इस कार्रवाई के बाद वाल्मीकिनगर के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और विभाग की आगामी पहल पर टिकी हैं कि क्या व्यापारियों को राहत मिलती है या फिर उजाड़ अभियान जारी रहता है।






