विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
मधुबनी, पूर्व प्रधानाचार्य पंडित विंध्यवासिनी प्रसाद त्रिपाठी के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में वृंदावन से पधारे सुविख्यात कथा व्यास पंडित राजेश तिवारी जी महाराज ने अपने भावपूर्ण कथा में कहा कि- रुप से राग तथा स्वरूप से अनुराग प्राप्त होता है। तुंगभद्रा के तट पर उत्तम नगर में आत्मदेव के घर उनकी पत्नी धुंधली के कुचक्र से धुंधकारी का जन्म एवं गौकर्ण की समाज सुधारक कथा सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर पूर्व प्राचार्य पंडित भरत उपाध्याय ने कहा कि पूर्व जन्मों के पुण्य अर्जित होने पर श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ आयोजित करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। यज्ञ आचार्य पंडित सत्यप्रकाश दुबे, श्रीनिवास मणि, निलेश त्रिपाठी, नित्यानंद जी, पंडित विनोद उपाध्याय, ब्रज नारायण मणि,दिनेश कुमार गुप्ता ,शैलेश त्रिपाठी, दुर्गेश त्रिपाठी, रमेश मणि, रितेश त्रिपाठी,देवेंद्र उपाध्याय उपेंद्र निषाद सहित सैकड़ों लोगों ने कथा अमृत पान किया।






