बर्बादी की राह पर नशेड़ियों के बढ़ते कदम
वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
देश का भविष्य माने जाने वाली युवा पीढ़ी आज नशे के दलदल में फंसती जा रही है। वाल्मीकिनगर क्षेत्र में नशे का अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है, जिसके कारण कम उम्र के युवक भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। स्थिति यह है कि कई युवा नशे की लत के कारण अपनी पढ़ाई, परिवार और भविष्य तक को दांव पर लगा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार वाल्मीकिनगर में नशे का सामान बड़ी आसानी से उपलब्ध हो जाता है। शराब और सिगरेट के अलावा गांजा, चरस, स्मैक और नशीली दवाइयों का सेवन भी युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, फोर्टविन और पेंटाजोसिन जैसे नार्कोटिक इंजेक्शन भी कुछ मेडिकल स्टोरों पर आसानी से मिल जा रहे हैं, जिससे स्थिति और चिंताजनक हो गई है।
बताया जाता है कि फोर्टविन का इंजेक्शन करीब 100 रुपये और पेंटाजोसिन का इंजेक्शन लगभग 110 रुपये में उपलब्ध हो जाता है। ये दोनों इंजेक्शन सामान्यतः ऑपरेशन से पहले या बाद में मरीजों को दर्द निवारक के रूप में दिए जाते हैं, लेकिन नशे के आदी युवक इनका दुरुपयोग कर रहे हैं। इस कारण कई युवा गंभीर स्वास्थ्य जोखिम में भी पड़ रहे हैं।
वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के जंगलों में भी नशेड़ियों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार कई युवक जंगल के एकांत स्थानों पर चरस और स्मैक का सेवन करते हैं। वे एल्युमिनियम की पतली पन्नी पर पाउडर रखकर उसे जलाते हैं और धुएं को सूंघकर नशा करते हैं। नशा करने के बाद वहां बड़ी संख्या में इस्तेमाल की गई सिरिंज, सूई, फोर्टविन और पेंटाजोसिन के खाली वायल फेंक दिए जाते हैं, जो इस बढ़ती समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं।
नशे की लत में फंसे कई युवक अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए चोरी, मारपीट, छिनतई और लूटपाट जैसे अपराधों का सहारा भी लेने लगे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में युवाओं की संलिप्तता बढ़ी है। इससे समाज में भी असुरक्षा का माहौल बनता जा रहा है।
हालांकि इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए एसएसबी और स्थानीय पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है। समय-समय पर नशे के कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। हाल ही में एसएसबी ने नशीले इंजेक्शन और अवैध शराब के कारोबार के आरोप में एक नेपाली युवक को गिरफ्तार कर स्थानीय पुलिस के हवाले किया था।
इसके बावजूद क्षेत्र में नशे का अवैध कारोबार पूरी तरह से थमता नजर नहीं आ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ समाज को भी जागरूक होना होगा। युवाओं को सही मार्गदर्शन और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तभी इस बढ़ती नशाखोरी पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
अगर समय रहते इस समस्या पर काबू नहीं पाया गया तो आने वाले दिनों में इसका असर पूरे समाज पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। इसलिए प्रशासन, समाज और परिवार सभी मिलकर युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने की जरूरत है।






