एक ही खम्भ से फल भी एवं सब्जी का पैदावार भी।
विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा प्रखण्ड एक के चखनी राजवटिया पंचायत में इन दिनों केले की एक अनोखी खेती चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां एक ही खम्भ (तना) से तैयार हुआ केला ऐसा है, जिसे कच्चे रूप में सब्जी के तौर पर और पकने के बाद फल के रूप में खाया जा सकता है। इस खासियत ने न केवल स्थानीय लोगों का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि किसानों के बीच भी नई संभावनाओं की उम्मीद जगाई है।
क्या है इस केले की विशेषता
सामान्यतः केले की अलग-अलग किस्में होती हैं—कुछ फल के लिए और कुछ सब्जी के लिए। लेकिन इस पौधे में दोनों गुण एक साथ देखने को मिले हैं। कच्चा रहने पर यह सब्जी के रूप में स्वादिष्ट और उपयोगी है, जबकि पकने पर इसका स्वाद मीठा और फल के रूप में उपयुक्त बताया जा रहा है। एक ही खम्भ से इस प्रकार का उत्पादन क्षेत्र में पहली बार देखने को मिला है।
किसानों के लिए क्या है संदेश
बहुउपयोगी फसल – किसान मथुरा यादव ने बताया कि एक ही फसल से दो तरह की उपयोगिता किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो सकती है। साथ ही बाजार में बेहतर मांग – सब्जी और फल दोनों रूप में बिक्री की संभावना से जोखिम कम होता है। जिसको कम लागत, अधिक लाभ – यदि यह किस्म स्थानीय जलवायु में सफल रहती है, तो कम लागत में अधिक मुनाफा संभव है।
नवाचार की जरूरत – यह उदाहरण बताता है कि आधुनिक या उन्नत किस्मों को अपनाकर किसान नई दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
कृषि जानकारों का मानना है कि यह किसी उन्नत या संकर (हाइब्रिड) किस्म का परिणाम हो सकता है। यदि कृषि विभाग द्वारा इसकी जांच और पुष्टि की जाती है, तो इसे बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित होकर वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने की ओर अग्रसर होंगे।
क्षेत्र में उत्सुकता का माहौल
इस अनोखे केले को देखने के लिए आसपास के गांवों से लोग पहुंच रहे हैं। किसान इसकी खेती की विधि, पौध की उपलब्धता और उत्पादन क्षमता के बारे में जानकारी लेने में रुचि दिखा रहे हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में नवाचार और प्रगतिशील खेती का सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। बतादे की चखनी राजवटिया पंचायत में उगा यह विशेष केला न केवल चर्चा का विषय है, बल्कि किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन सकता है। यदि सही मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग मिले, तो ऐसी बहुउपयोगी फसलें क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकती हैं।






