वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
राज्य वानिकी प्रशिक्षण संस्थान, गया से आए 36 वनरक्षियों की टीम इन दिनों वाल्मीकिनगर वनक्षेत्र में पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर में भाग ले रही है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम वन्यजीव अधिवास प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है, ताकि वनरक्षी जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा एवं संरक्षण में और अधिक दक्ष बन सकें। वीटीआर वन प्रमंडल दो के अंतर्गत वाल्मीकिनगर वनक्षेत्र के सभागार में मंगलवार से प्रशिक्षण की औपचारिक शुरुआत हुई। प्रशिक्षण के दौरान वनरक्षियों को जंगल के अंदर व्यावहारिक जानकारी के साथ-साथ सभागार में सैद्धांतिक ज्ञान भी दिया जा रहा है। वाल्मीकिनगर वनक्षेत्र अधिकारी सत्यम कुमार ने बताया कि सोमवार को राज्य वानिकी प्रशिक्षण संस्थान गया से 36 वनरक्षियों की टीम यहां पहुंची। पांच दिनों तक चलने वाले इस शिविर में वन्यजीव अधिवास प्रबंधन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के संरक्षण में अधिवास प्रबंधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए इस दिशा में वनरक्षियों को प्रशिक्षित करना आवश्यक है।

प्रशिक्षण के दौरान विशेष रूप से ग्रासलैंड प्रबंधन पर जोर दिया गया। वनक्षेत्र अधिकारी ने बताया कि शाकाहारी एवं मांसाहारी वन्यजीवों के लिए संतुलित एवं पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसके लिए बेहतर घासभूमि (ग्रासलैंड) का विकास और रखरखाव बेहद जरूरी है। इसी प्रकार जंगल में आग की घटनाओं को रोकने के लिए फायर लाइन तैयार करने और उसकी नियमित निगरानी पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वनरक्षियों को प्रभावी पेट्रोलिंग, वनपथ (फॉरेस्ट ट्रेल) के रखरखाव तथा जंगल में वन्यजीवों की आवाजाही के अध्ययन के संबंध में भी प्रशिक्षित किया गया। इसके अलावा जंगल में बने वाटर हॉल के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, ताकि गर्मी के मौसम में शाकाहारी और मांसाहारी जानवरों को समय पर पानी उपलब्ध हो सके।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वीटीआर वन प्रमंडल दो के बॉयोलॉजिस्ट सौरभ कुमार ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से वन्यजीव प्रबंधन की बारीकियों को समझाया। वहीं राज्य वानिकी प्रशिक्षण संस्थान गया के कोर्स डायरेक्टर उपेंद्र सिंह ने वनरक्षियों को व्यवहारिक अनुभव साझा करते हुए अधिवास प्रबंधन के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान वनरक्षियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाएं भी शांत कीं। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम से वनरक्षियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और वीटीआर क्षेत्र में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को और मजबूती मिलेगी।
पांच दिवसीय यह प्रशिक्षण शिविर न केवल वनरक्षियों के ज्ञान को समृद्ध करेगा, बल्कि जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम भी साबित होगा।






