Monday, February 23, 2026
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एसएसबी एवं बिहार पुलिस के संयुक्त तत्वाधान में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ तथा ‘नशा मुक्त’ अभियान के तहत जन जागरूकता रैली का किया आयोजन

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वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट

इंडो नेपाल बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा में तैनात 21वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) एवं बिहार पुलिस के संयुक्त तत्वाधान में सोमवार को ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ तथा‘नशा मुक्त’ अभियान के तहत जनजागरूकता रैली का आयोजन किया गया। सीमावर्ती क्षेत्र में आयोजित इस रैली ने सामाजिक सरोकार के प्रति सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित किया।
रैली में एसएसबी के जवानों के साथ विद्यालयों के छात्र-छात्राएं तथा शिक्षक उत्साहपूर्वक शामिल हुए। रैली प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए गोल चौक परिसर में पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे मार्ग में प्रतिभागियों ने “नशा छोड़ो, जीवन से नाता जोड़ो”, “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,नशा मुक्त भारत – स्वस्थ भारत” जैसे प्रेरणादायक नारों से वातावरण को जागरूकता के संदेश से गुंजायमान कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों को नशा न करने एवं दूसरों को भी नशा से दूर रहने के लिए प्रेरित करने की शपथ दिलाई गई।

इस अवसर पर एसएसबी के निरीक्षक लोकेश कुमार बनिया ने बताया कि कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ जन-जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार है। यदि समाज एकजुट होकर संकल्प ले, तो नशे जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। निरीक्षक ने यह भी बताया कि सशस्त्र सीमा बल केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर भी सक्रिय भूमिका निभाती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में नशे की रोकथाम के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम, संवाद और रैलियों का आयोजन किया जाता है, ताकि युवा पीढ़ी को सही दिशा मिल सके।


विद्यालय के छात्र-छात्राओं की भागीदारी इस कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रही। छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर नशा विरोधी संदेश दिए और लोगों से अपील की कि वे स्वयं भी नशे से दूर रहें तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करें। कार्यक्रम के अंत में छात्र-छात्राओं और एसएसबी जवानों को नशा मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प दिलाया गया।
वाल्मीकिनगर थानाध्यक्ष मुकेश चंद्र कुमर ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छात्रों को विशेष रूप से निर्देश दिया गया कि वे घर-घर जाकर नशा मुक्ति का संदेश फैलाएं और लोगों को जागरूक करें।इस जनजागरूकता रैली से क्षेत्र में नशा सेवन के खिलाफ सकारात्मक भावनाएं जागृत हुई हैं। लोगों ने आशा व्यक्त की कि ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित होते रहेंगे, जिससे सीमावर्ती क्षेत्र में नशा मुक्त समाज के निर्माण का सपना साकार हो सके।

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