विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा अनुमंडल के मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने विभिन्न मांगलिक कार्यक्रमों में शामिल होते हुए कहा कि -अतिथी देवो भव की परंपरा में भोजन करने की महत्वपूर्ण व्यवस्था है! मेरा निवेदन है कि थाली में जूठा कत्तई नहीं छोड़ें। पूर्व प्राचार्य ने आगे कहा कि -भोजन में जूठा छोड़ने वाले की आयु कम होती जाती है. शायद इसी कारण से हमारे पूर्वज खाना खाकर थाली में पानी डाल कर फिर जूठन को घोल कर पी जाया करते थे।विद्वानों के अनुसार थाली में जूठा भोजन छोड़ना मां अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी का अपमान माना जाता है।

ऐसा करने से आर्थिक स्थिति कमजोर होती है। साथ ही घर आती लक्ष्मी भी रूठ कर चली जाती है।भोजन जूठा छोड़ने वाले बच्चे पढ़ाई में कमजोर होते चले जाते हैं। मन पढ़ाई से धीरे धीरे पूरी तरह हट जाता है। इसलिए बच्चे पहली बार में जितना खा सकते हैं उतना ही परोसें।थाली में जूठा भोजन छोड़ने से शनि का प्रकोप झेलना पड़ सकता है। इसके साथ ही चंद्रमा की भी अशुभ दृष्टि व्यक्ति के जीवन पर पड़ने लग जाती है। चंद्रमा की भी अशुभ दृष्टि की वजह से मानसिक बीमारियां भी व्यक्ति को घेर लेती हैं।इसके अलावा यदि आप यात्रा के दौरान जूठा भोजन फेंकते हैं तो आपके काम कभी नहीं बनते या बनते काम भी बिगड़ने शुरू हो जाते हैं!थाली में जूठा भोजन छोड़ने से व्यक्ति पाप का भागी बनता है। इसलिए थाली में भोजन उतना ही लेना चाहिए जितना खा सकें और कोशिश करें कि कभी भी भोजन व्यर्थ न हो। यदि किसी कारण वश भोजन थाली में छूट जाता है तो हाथ जोड़कर मां अन्नपूर्णा से माफी मांगे. खाओ मन भर, छोड़ो न कण भर।






