विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (टीयूसीआई) की जिला कमिटी के आह्वान पर शहीद स्मारक से चार लेबर कोड के विरोध में एक विशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए समाहरणालय गेट पहुंचा, जहां वह सभा में तब्दील हो गया। सभा स्थल पर श्रम संहिताओं को “काला कानून” बताते हुए उनकी प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया गया।
सभा को संबोधित करते हुए टीयूसीआई के केंद्रीय कमिटी सदस्य सह भाकपा (माले) रेड फ्लैग के राज्य सचिव कॉमरेड रवीन्द्र कुमार ‘रवि’ ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दावा कि नई श्रम संहिताएं सभी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, पूरी तरह निराधार है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के 90 प्रतिशत से अधिक असंगठित मजदूर इन कानूनों के दायरे से बाहर हैं और अब संगठित क्षेत्र के बड़े हिस्से को भी कानूनी संरक्षण से वंचित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड के तहत 300 से कम श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों को छंटनी और बंदी के लिए पूर्व सरकारी अनुमति से छूट दे दी गई है, जबकि पहले यह सीमा 100 थी। इसी प्रकार छोटे उद्योगों को व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों संबंधी कई प्रावधानों से मुक्त कर दिया गया है। वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2021–22 का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 100 से कम श्रमिकों वाले कारखाने कुल कारखानों का 79.2 प्रतिशत हैं।
टीयूसीआई ने ₹26,000 प्रतिमाह न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग दोहराई और सरकार से वर्तमान न्यूनतम वेतन व उसके प्रवर्तन की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। जिला संयोजक हरिशंकर प्रसाद और पूर्व पार्षद रीता रवि ने भी श्रम संहिताओं को श्रमिक विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। सभा को अवधेश राम, रसूल मियां, राजू राम, भगेलू राम, महंथ राम और चंदा देवी समेत अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया।






