विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
13 फरवरी। उत्तर प्रदेश के उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के निवासी ज्ञानी यादव ने अपनी पत्नी की मार्मिक कहानी साझा करते हुए बताया कि लिवर कैंसर से जूझ रही उनकी पत्नी को बड़े अस्पताल के चिकित्सकों ने अंतिम अवस्था बताकर कुछ दवाइयों के साथ घर भेज दिया था। उस समय परिवार के लिए स्थिति अत्यंत दुष्कर हो गई थी। असहनीय दर्द से पीड़ित मरीज रात-रात भर तड़पती रहती थी और पूरा परिवार उसकी सेवा में जागता रहता था।
ज्ञानी यादव के अनुसार उनकी पत्नी दर्द से व्याकुल होकर ईश्वर से मृत्यु की प्रार्थना करती थीं और कई बार परिजनों से जहर मांगकर कष्ट से मुक्ति की बात कहती थीं। ऐसे कठिन समय में गांव के कुछ लोगों ने उन्हें होम्योपैथी उपचार के बारे में जानकारी दी और बगहा स्थित होमियो कैंसर सेवा अस्पताल जाने की सलाह दी।

अगले ही दिन परिजन अस्पताल पहुंचे और कैंसर विशेषज्ञ डॉ पदम भानु सिंह से मिलकर अपनी व्यथा सुनाई। डॉक्टर के निर्देशानुसार होम्योपैथिक दवाएं शुरू की गईं। पति का दावा है कि मात्र 24 घंटे के भीतर मरीज को दर्द में आश्चर्यजनक राहत मिलने लगी और धीरे-धीरे वह सामान्य रूप से आराम करने लगीं।
ज्ञानी यादव बताते हैं कि उनकी पत्नी लगभग तीन महीनों तक जीवित रहीं और इस अवधि में उन्हें पहले जैसी पीड़ा नहीं हुई। अंततः उन्होंने बिना अत्यधिक दर्द और बेचैनी के शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली।
पीड़िता के पति ने भावुक स्वर में कहा कि उस कठिन समय में डॉ पदम भानु सिंह और उनकी होम्योपैथिक दवा उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं थी।






