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सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारी है श्रेष्ठ विवाह संस्कार -पं-भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज मधुबनी के पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने अपने प्रिय शिष्य राघवेन्द्र सिंह को विवाहोपरांत आशीर्वाद देते हुए कहा कि आज से नवदम्पत्ति गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर रहे हैं, इनको उपस्थित लोगों का सफल, स्वस्थ और सुखद जीवन का आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है । उन्होंने कहा कि वाणी के दान से कन्या का पति नहीं हो सकता, किंतु विवाह संस्कार की सप्तपदी कर लेने के बाद ही पतित्व प्राप्त होता है।

कन्या यथाधिकार सौंपना ही दान है। जिस पर स्व का अधिकार नहीं रहता स्वीकार करने वाले का अधिकार है। कन्या का वर के द्वारा यथाधिकार स्वीकरण के बाद वधू पाणिग्रहण विधि कर्म से भार्या सप्ताचल पूजन आदि सप्त वचन ग्रहण के बाद पत्नी होती है। वर-वधू का कल्याण हो।
इस अवसर पर संतोष सिंह राठौर, संजय द्विवेदी, दिनेश गुप्ता, रौनक पांडेय सहित सैकड़ों लोगों ने पुलकित मन से नवदम्पत्ति को आशीर्वाद दिया।

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