विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
पढ़ाई कैसे हो, साहब? जब स्कूल में न भवन है, न बुनियादी सुविधाएँ। तस्वीर बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया अंतर्गत मझौलिया प्रखंड की है, जहाँ राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, गुरचुरवा वृत्ति टोला में बच्चों की पढ़ाई पेड़ के नीचे दरी बिछाकर कराई जा रही है।
इस स्कूल में महज 10–20 नहीं, बल्कि कुल 227 नामांकित छात्र हैं, जिनमें से लगभग 200 बच्चे प्रतिदिन पढ़ने के लिए विद्यालय पहुँचते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि विद्यालय भवन के अभाव में बच्चों को खुले आसमान के नीचे, पेड़ की छांव में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
स्थानीय शिक्षकों के अनुसार, पहले इस विद्यालय में छात्रों की संख्या लगभग 500 तक हुआ करती थी, लेकिन लगातार बदतर होती व्यवस्थाओं के कारण अभिभावक धीरे-धीरे बच्चों को सरकारी विद्यालय से दूर ले गए।
विद्यालय के शिक्षक रामसूरत महतो ने बताया,
“शिक्षा विभाग को कई बार विद्यालय भवन निर्माण के लिए लिखित रूप से अवगत कराया गया है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। स्कूल में शिक्षक-शिक्षिकाओं की पर्याप्त संख्या है और बच्चों को पढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन भवन नहीं होने के कारण बच्चों को पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है।”
यह स्थिति न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सरकारी दावों की जमीनी हकीकत भी उजागर करती है।






