त्रिवेणी के संगम तट पर आज डुबकी लगाए,अरेराज में विराजमान सोमेश्वर महादेव को शिवरात्रि के दिन करेंगे जलाभिषेक
वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली वाल्मीकि नगर में इन दोनों शिव भक्तों का जमावड़ा लगने लगा है। ये शिव भक्त यूपी और बिहार के विभिन्न जिलों के विभिन्न कस्बों के रहने वाले हैं। जो महाशिवरात्रि पर गंगा स्नान के लिए वाल्मीकिनगर पहुंच रहे हैं। लगभग 170 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय कर ये शिव भक्त वाल्मीकिनगर में पहुंच, हर-हर महादेव की जय घोष से वातावरण को भक्तिमय बनाए हुए हैं। पीली धोती, लाल पगड़ी और साइकिल में चटाई बांधे हुए शिव भक्तों की यह टोली लोगों के अंदर भक्ति की भावना जागृत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ पा रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बीच नारायणी के तट पर ये अपना आशियाना बना, खुले आकाश के नीचे भजन कीर्तन करने में लगे हुए हैं। मोतिहारी के कोटवा देवी स्थान से आए लगभग 80 की संख्या में शिव भक्तों में हुकूम यादव, मनोज ठाकुर, बाला प्रसाद यादव एवं उत्तर प्रदेश के पडरौना रामकोला निवासी नंदलाल रावत, कृष्णा प्रसाद ने बताया कि रविवार कि सुबह हम गंगा स्नान कर अपने-अपने शिवालयों के लिए रवाना हो जाएंगे। गंगा स्नान के बाद सर्वप्रथम बोल बम मंडली की बैठक होगी, बैठक में रास्ते की पड़ाव का चयन किया जाएगा, उसके बाद जल पूजन व परिक्रमा की विधि विधान के बारे में चर्चा कर गुरु पूजन किया जाएगा। उसके बाद प्रत्येक 8 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ठहराव का नियम बना, हम लोग निश्चित समय पर अपने-अपने मंदिरों में पहुंच जलाभिषेक करेंगे।

महाशिवरात्रि जलाभिषेक के बाद होगा कन्या पूजन: पूर्वी चंपारण के कोटवा देवी स्थान से पहुंचे शिव भक्तों ने बताया कि आगामी शुक्रवार को महाशिवरात्रि के दिन हम अरेराज के सोमेश्वर नाथ महादेव को जलाभिषेक करेंगे। उसके बाद हम अपने-अपने गांव में पहुंच, विधि विधान से कन्या पूजन का रस्म अदा करेंगे। उसके बाद गांव के मंदिरों में भजन कीर्तन कर भंडारा का आयोजन किया जाएगा। जब तक भंडारा नहीं हो पाएगा, तब तक कोई भी कांवर मंडली का सदस्य अपने घर नहीं जा सकता है। कांवरियों का साइकिल से यात्रा करने का ये है उद्देश्य: लगभग 170 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए साइकिल से आने के उद्देश्य के बारे में, घोड़ासहन के शिव भक्त अमरदेव सिंह ने बताया कि, इससे हमें रास्ते में मिलने वाले प्रत्येक मंदिरों में ठहरने व भजन कर कीर्तन करने का मौका मिल जाता है। साथ ही भक्ति के लिए शरीर को कष्ट देना जरूरी होता है। इससे भगवान शिव अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। हम आते और जाते समय सार्वजनिक स्थलों एवं धार्मिक स्थलों पर ठहरना पसंद करते हैं। इससे हमारे उपासना में रुकावट नहीं होती है।






