एक हजार फीट की ऊंची पहाड़ी पर चढ़ने के लिए 14 किमी की दूरी तय करेंगे श्रद्धालु
वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
भारतीय सीमा से सटे नेपाल के महलवारी में स्थित मदरिया पहाड़ पर लगने वाला आठ दिवसीय मदार बाबा का मेला शुक्रवार को जुम्मे के नमाज अदा करने के साथ हीं शुरू हो गया। सैकड़ो वर्ष पुराना इस मेले में विशेषकर यूपी के विभिन्न हिस्सों से हिन्दू मुसलमान समुदाय के लोग पहुंचते हैं। कुछ वर्ष पूर्व से बिहार के विभिन्न जिलों से भी श्रद्धालु मन्नत मांगने के लिए मदार बाबा के दरबार में पहुंचने लगे हैं। जिसके कारण यह मिला अब हिंदू मुसलमान दोनों समुदाय के लोगों के नाम से जाना जाने लगा है। 1000 फीट की ऊंची पहाड़ी पर स्थित मदार बाबा के मजार पर लोग चादर चढ़ा मन्नत मांगते हैं। वही जिसकी मन्नते पूरी हो गई होती है वह मजार पर पहुंचे वहां स्थित पीपल के पेड़ पर चादर के टुकड़े को बांध बाबा से आशीर्वाद लेते हैं। 14 किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ने के लिए श्रद्धालु दम मदार बेड़ा पार का जयकारा लगाते हुए वहां पहुंच, मजार पर चादर चढ़ा परिक्रमा करते हैं। लगभग आठ दिनों तक भारतीय सीमा से लेकर नेपाल तक दिन रात श्रद्धालु आते-जाते रहते हैं जिसके कारण यहां के व्यापारियों के व्यापार में भी काफी इजाफा होता है। नेपाल के पांच नंबर प्रदेश अंतर्गत आने वाले इस मेले में नेपाल सरकार की तरफ से भी सुविधाएं प्रदान की जाती है। नेपाल पुलिस से लेकर बिहार पुलिस तक 24 घंटे आने वाले श्रद्धालुओं के सुरक्षा में तैनात किए जाते हैं।

ये है मेले का इतिहास: भारतीय सीमा से सटे मदरिया पहाड़ पर प्रत्येक वर्ष फरवरी महीने में लगने वाले मदार बाबा के मेले के बाबत जानकारी देते हुए कुतुबुल मदार शाह मस्जिद के इमाम निजामुद्दीन अंसारी ने बताया कि, जब भगवान शंकर अपनी बारात को लेकर राजा हिमांचल के घर जा रहे थे, तो उनके साथ बाराती के रूप में जाने वाले भूत प्रेतों को भगवान शंकर द्वारा इसी पहाड़ पर ठहरने के लिए कहा गया था। उसके बाद से वे भूत प्रेत भगवान भोलेनाथ की आदेश का इंतजार करते हुए अभी तक इसी पहाड़ी पर विराजमान है। इसी के कारण यहां भूत प्रेत के बाधा झेलने वाले श्रद्धालु पहुंच, झाड़ फूंक करवाते हैं। और यहां से स्वस्थ होकर जाते हैं।नेपाल सरकार व मेला कमिटी को होती है करोड़ों रुपए की राजस्व कमाई: माघ महीने से शुरू और फागन महीने के पहले पख में समाप्त होने वाले मदार बाबा के मेले में नेपाल सरकार व मदर बाबा मेला कमेटी को करोड़ों रुपए की राजस्व की कमाई होती है। मेला कमेटी के द्वारा हुई आमदनी का खर्च मजार की विकास व श्रद्धालुओं को दिए जाने वाले सुविधाओं में खर्च की जाती है। जबकि सरकार के हिस्से की राजस्व को उसके खाते में डाला जाता है। साथी स्थानीय व्यापारियों को भी राजस्व की अच्छी कमाई होती है।






